सदियों से, खट्टे फलों (जैसे संतरे, नींबू, मीठे नींबू और भारतीय आंवले) को उनके औषधीय गुणों के कारण, बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए बेहतरीन प्राकृतिक संसाधनों के रूप में माना जाता रहा है. इन्हें अपने डाइट में शामिल करने से न केवल विभिन्न बीमारियों का खतरा कम होता है, बल्कि एनर्जी लेवल भी बढ़ता है और मूड भी बेहतर होता है. खट्टे फलों में मौजूद विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे सर्दी और खांसी से राहत मिलती है. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल त्वचा की रंगत निखारता है, पाचन क्रिया को कंट्रोल करता है और दिल को हेल्दी रखने में मदद करता है.
विशेषज्ञों का सुझाव है कि रोजाना सिर्फ एक संतरा खाने से न केवल सर्दी, खांसी या छींक आने से बचाव होता है, बल्कि पूरा शरीर भी स्वस्थ रहता है. कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि विटामिन C पाचन तंत्र के कैंसर के खतरे को कम करने में एक प्रभावी अवरोधक (इन्हिबिटर) के रूप में काम कर सकता है.
‘जर्नल ऑफ थिअरेटिकल बायोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, विटामिन C पेट में होने वाली उन नुकसानदायक केमिकल रिएक्शन को रोकता है जिनसे कैंसर हो सकता है.
विटामिन C क्या है
विटामिन C एक पानी में घुलने वाला विटामिन है जो शरीर की पूरी सेहत और काम करने के लिए जरूरी है. यह माइक्रोन्यूट्रिएंट इम्यूनिटी बढ़ाने, इन्फेक्शन से लड़ने और स्किन, ब्लड वेसल, हड्डियों और कार्टिलेज की सेहत बनाए रखने में मदद करता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि खून में विटामिन C का लेवल बनाए रखना बहुत जरूरी है. वे बताते हैं कि शरीर इस विटामिन को ज्यादा समय तक स्टोर नहीं करता है. स्वस्थ लोगों को अपने खून में सही लेवल बनाए रखने के लिए रोजाना 250 मिलीग्राम विटामिन C लेना चाहिए. ताजे फल, सब्जियां, बेरी, शिमला मिर्च और ब्रोकली विटामिन C के अच्छे सोर्स हैं. इसके साथ ही खट्टे फल, बेरी, टमाटर और पत्तेदार सब्जियां या सप्लीमेंट के रूप में इसे ले सकते हैं.
शोध क्या कहता है
यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के रिसर्चर्स ने मैथमेटिकल मॉडलिंग से यह साबित किया है कि खाने या सप्लीमेंट्स के रूप में लिया गया विटामिन C, पेट में ‘नाइट्रोसेशन’ रिएक्शन को कम करके कैंसर पैदा करने वाले कंपाउंड्स को बनने से रोकता है. पिछले कई दशकों में, नॉर्थ अमेरिकन डाइट में नाइट्रेट और नाइट्राइट का लेवल लगातार बढ़ा है, ये कंपाउंड प्रोसेस्ड मीट के साथ-साथ खराब मिट्टी और पानी में उगने वाले फलों और सब्जियों में भी पाए जाते हैं. हालांकि नाइट्रेट और नाइट्राइट नर्वस सिस्टम और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन पेट के अंदर, वे नाइट्रोसेशन नाम का एक केमिकल रिएक्शन कर सकते हैं, जिससे ऐसे केमिकल बनते हैं जिनके बारे में कई साइंटिस्ट मानते हैं कि वे कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं.
इसके लिए शोधकर्ताओं ने लार ग्रंथियों, पेट, छोटी आंत और प्लाज्मा का एक मैथमेटिकल मॉडल तैयार किया, जिससे यह समझा जा सके कि नाइट्रेट और नाइट्राइट शरीर में कैसे करते हैं और समय के साथ कैसे बदलते हैं.उनके मॉडल ने दिखाया कि जब खाने में विटामिन C भी मौजूद होता है (जैसे पालक जैसी पत्तेदार सब्जियों में, जिनमें विटामिन C और नाइट्रेट दोनों होते हैं) तो इससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है.
स्टडी में यह भी बताया गया है कि हर खाने के बाद विटामिन C सप्लीमेंट लेने से नाइट्रोसेशन प्रोडक्ट्स बनने को कम करने में थोड़ा अच्छा असर हो सकता है. नाइट्रोसेशन प्रोडक्ट्स कैंसर के खतरे से जुड़े होते हैं. ये प्रोडक्ट्स डाइट में मौजूद नाइट्राइट्स और नाइट्रेट्स से बनते हैं, जैसे कि बेकन और सलामी जैसी खाने की चीजों में पाए जाते हैं. रिसर्चर्स को उम्मीद है कि ये नतीजे भविष्य की न्यूट्रिशनल रिसर्च में मददगार होंगे.

