जगदलपुर:- झीरम घाटी नरसंहार एक ऐसा खूनी अध्याय, जिसने छत्तीसगढ़ की सियासत को हमेशा के लिए बदल दिया था. 13 साल बाद दरभा के झीरम घाटी में घटे इस बड़े नक्सली हमले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी करार दिया. आज जगदलपुर के विशेष NIA कोर्ट में सभी 10 आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा पेश किए गए तमाम सबूतों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहसों को सुनने के बाद विशेष एनआईए कोर्ट ने 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया.
झीरम हमले के दोषी
प्रमिला मोडियाम
चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
सुमित्रा पुनेम मोडियाम
मुक्का मंडावी
कोसा कवासी
आयता मरकाम
मड़कामी देवा
जोगा मड़कामी
बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ ड़ेंगा
महादेव नाग
झीरम मामले में कांग्रेस का आरोप
5 सितंबर को एनआईए के फैसले के बाद बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने इसे अधूरा न्याय बताया. प्रदेशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उच्च न्यायालय की शरण में जाने की बात कही. भूपेश बघेल ने यह तक आरोप लगाया कि झीरम हमले के असली आरोपियों से पूछताछ तक नहीं हुई. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उनके पास झीरम हमले के सूबत है. कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों को दोषी बनाया गया है वो मामूली कैडर के नक्सली है.
इधर पूरे बस्तर में चर्चा है कि दोषियों को अदालत आज क्या सजा सुनाएगी. शहर के चौक चौराहों में झीरम मामलें की चर्चा तेजी से हो रही है. कई लोगों आपस में यह भी बातें कह रहे हैं कि अदालत के फैसले के बाद का माहौल देखने के लिए न्यायालय का रुख करेंगे.
झीरम घाटी नक्सली हमला
25 मई 2013 को सुकमा जिले से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी में माओवादियों ने एम्बुश लगाकर गोलीबारी शुरू कर दी. इस नक्सली हमले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 लोगों की जान गई. कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले ने छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया. कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी. यह एक ऐसा हमला था जिसकी गूंज 13 साल बाद भी बस्तर के झीरम घाटी में सुनाई देती है.

