रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी खुशी के लिए उपहार देते हैं. 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा. ऐसे में उपहार को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं. आचार्य विजय कुमार के अनुसार, सनातन धर्म में कुछ वस्तुओं को दान के लिए शुभ माना गया है, लेकिन इन्हें उपहार के रूप में देने से बचने की सलाह दी जाती है.
काले रंग की चीजें देने से बचें
आचार्य विजय कुमार के अनुसार, रक्षाबंधन पर भाई को अपनी बहन को काले रंग की वस्तुएं उपहार में देने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में काले रंग का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है. शनि से जुड़ी नकारात्मकता को दूर करने के लिए काले रंग की वस्तुओं का दान करने की परंपरा बताई गई है. इसी वजह से इन्हें भाई-बहन के रिश्ते में उपहार के तौर पर देने से बचने की सलाह दी जाती है. केवल काली वस्तुओं ही नहीं, बल्कि काले रंग के कपड़े भी रक्षाबंधन पर बहन को उपहार में देने से बचना चाहिए. शनि से संबंधित चीजों का दान योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण को करने का विधान बताया गया है.
धारदार चीजें देने से बचें
आचार्य विजय कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर बहन को नुकीली या धारदार वस्तुएं भी उपहार में नहीं देनी चाहिए. इनमें चाकू, कैंची और इसी तरह की अन्य चीजें शामिल हो सकती हैं. धार्मिक मान्यताओं में ऐसी वस्तुओं को उपहार के लिए शुभ नहीं माना जाता. इसलिए भाई इन चीजों की जगह बहन की पसंद की कोई दूसरी वस्तु दे सकते हैं. इसके अलावा कांच से बनी वस्तुओं को लेकर भी ऐसी ही धार्मिक मान्यता बताई गई है. आचार्य विजय कुमार अनुसार, रक्षाबंधन पर बहन को कांच से बने उपहार देने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय मान्यताओं में कांच से जुड़ी वस्तुओं को राहु से संबंधित माना जाता है और इनके माध्यम से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ने की बात कही जाती है.
उपहार देते समय रखें इन बातों का ध्यान
रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहन को उसकी पसंद के कपड़े, मिठाई, किताबें, ज्वेलरी या उपयोगी सामान उपहार में दे सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उपहार का उद्देश्य प्रेम और शुभकामना होना चाहिए. काले रंग, धारदार वस्तुओं और कांच से जुड़े उपहारों को लेकर बताई गई बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, इसलिए इन्हें आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए.

