रायपुर:- लक्ष्मी पूजन से लेकर पार्थिव शिवलिंग तक हर जगह मिट्टी की प्रतिमा का बेहद खास महत्व होता है. इसे शुभ भी माना जाता है, क्योंकि सनातन धर्म और परंपरा में मिट्टी की मूर्ति को अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है. इसका धार्मिक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है. सनातन परंपरा में मिट्टी को एक प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि पृथ्वी तत्व का प्रतीक भी माना गया है, जो जलवायु अग्नि और आकाश के साथ मिलकर आधार बनती है. हमारा शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से मिलकर बना है. मिट्टी की मूर्ति के महत्व के बारे में ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी से जानते हैं.
प्रकृति से प्रकृति की पूजा
ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी बताते हैं- मां लक्ष्मी का एक नाम अन्न भी है. लक्ष्मी का एक नाम संपत्ति भी है. लक्ष्मी का एक नाम खेत भी है. लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी जी की पूजा होती है. दिवाली में अक्सर लोग मां लक्ष्मी की मिट्टी की मूर्ति की ही पूजा करते हैं, क्योंकि हमारे यहां सनातन में प्रकृति से प्रकृति की पूजा होती है तो फिर अकेले लक्ष्मी पूजन कैसे हो सकता है. तीजा, पोला, नवरात्रि, गणेश, छठ, पार्थिव शिवलिंग पार्थिव पूजन के विधान से संपन्न होते हैं.
ज्योतिष एवं वास्तुविद बताते हैं -पृथ्वी जल वायु आकाश अग्नि ऐसे पांच तत्वों से हमारा शरीर बना हुआ है. तत्वों से मूर्ति बनी और पंच तत्वों से संसार का निर्माण हुआ है. प्रकृति से प्रकृति की पूजा होती है. इसलिए मिट्टी की मूर्ति को हर पूजा में श्रेष्ठ माना जाता है. हर साल एक नई मिट्टी की मूर्ति लाते हैं और पुरानी मिट्टी की मूर्ति को विसर्जित करते हैं. यही इस नियम से हर साल लोग लक्ष्मी गणेश और सरस्वती की प्रतिष्ठा और पूजन करते हैं.
मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करना और फिर उसका जल में विसर्जन करना यह संदेश देता है कि इस संसार में जो कुछ भी उत्पन्न हुआ है, जैसे मनुष्य का शरीर उसका एक दिन प्रकृति में विलीन होना निश्चित है. यह हमें अहंकार से दूर रहकर प्रकृति का सम्मान करना सिखाता है.
मिट्टी की प्रतिमा की पूजा का वास्तु महत्व
पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी बताते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मिट्टी से बनी देवी देवताओं की प्रतिमा जैसे गणेश लक्ष्मी या फिर सरस्वती रखने से सकारात्मक ऊर्जा आती है. आर्थिक तंगी दूर होती है.
पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाएं
प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियां विसर्जन के बाद जल स्रोतों जैसे नदी तालाब में आसानी से घुल जाती है और जल को प्रदूषित नहीं करती. आजकल बाजार में मिलने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियां न सिर्फ पानी को जहरीला बनाती है, बल्कि जलीय तत्वों को भी नुकसान पहुंचाती है. मिट्टी की मूर्तियां पूरी तरह से इको फ्रेंडली यानी पर्यावरण की अनुकूल होती है.

