बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि बिना उचित कारण पति के साथ नहीं रहना और वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन नहीं करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने 5 नवंबर को यह फैसला सुनाया। मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी सिद्धार्थ जनबंधु और उनकी पत्नी ऐतिश्री के वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों का विवाह 1 जनवरी 2015 को हुआ था और उनका बेटा मां के साथ रह रहा है।
पति के मुताबिक, पत्नी आगे पढ़ाई करना चाहती थी और उसने कभी उसकी पढ़ाई का विरोध नहीं किया। बल्कि डोंगरगढ़ से ट्रेन के जरिए दुर्ग आकर पढ़ाई करने की सलाह दी थी, ताकि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभाई जा सकें। पत्नी ने बीकॉम, पीजीडीसीए और एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूरी की और दुर्ग जिला अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी भी की। पति का आरोप था कि पत्नी डोंगरगढ़ में उसके और अपनी सास के साथ रहने को तैयार नहीं थी। उसने दुर्ग के बजाय डोंगरगढ़ में समान वेतन पर नौकरी का विकल्प भी दिया, लेकिन पत्नी ने इसे स्वीकार नहीं किया। विवाद बढ़ने पर पति ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन किया, जबकि पत्नी ने भरण-पोषण का मामला दायर किया। बाद में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से दोनों ने साथ रहने की कोशिश भी की, लेकिन उनके बीच विवाद खत्म नहीं हुआ।
पत्नी ने अदालत में पति के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसे घर से निकाल दिया गया था और वह वैवाहिक संबंध बनाए रखना चाहती थी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पति ने पत्नी को पढ़ाई या उसकी पसंद की नौकरी करने से रोका हो, इसका कोई प्रमाण नहीं है। पत्नी के पिता की गवाही से भी सामने आया कि विवाद के बाद पति उससे मिलने नियमित रूप से दुर्ग जाता था। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के नरेंद्र बनाम के. मीना फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना उचित कारण पति से अलग रहना और लगातार वैवाहिक जीवन से दूरी बनाए रखना मानसिक क्रूरता हो सकता है। दुर्ग परिवार न्यायालय ने 3 अगस्त 2024 को मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, पत्नी के कथित विवाहेतर संबंधों के आरोपों पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की।

