किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े खाते, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की डिजिटल सदस्यता, सोशल मीडिया तथा मनोरंजन सेवाओं के खातों का क्या होता है? उसके उत्तराधिकारियों को इन खातों तक पहुंच कैसे मिलेगी और वे कैसे जान पाएंगे कि मृतक इन खातों के बारे में क्या चाहता था? ज्यादातर लोगों ने इन सवालों पर विचार नहीं किया है. योजना का अभाव निकट संबंधियों के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकता है.
हमने यह अध्ययन किया कि बुजुर्गों को मृत्यु के बाद ऑनलाइन खातों के प्रबंधन के बारे में सोचते समय किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए हमने 60 वर्ष से अधिक उम्र के 21 अमेरिकी वयस्कों से उनके ऑनलाइन खातों से जुड़ी चिंताओं, जरूरतों और तौर-तरीकों के साथ-साथ यह जानने की कोशिश की कि इन खातों के प्रबंधन की योजना बनाना उनके लिए कैसे आसान हो सकता है.
हमने जिन लोगों से बातचीत की, उनमें से ज्यादातर ने अपनी वसीयत तैयार कराने के लिए वकीलों या संपत्ति नियोजन विशेषज्ञों की सेवाएं ली थीं. वसीयत में यह स्पष्ट किया गया था कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी धन-संपत्ति और भौतिक संपत्तियों का प्रबंधन कैसे किया जाए. वे चाहते थे कि उनके उत्तराधिकारियों को पीछे छोड़ी गई संपत्ति और धन तक आसानी से पहुंच मिल सके.
वे यह भी चाहते थे कि उनके परिजन उनकी डिजिटल संपत्ति तक आसानी से पहुंच सकें, लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई औपचारिक योजना नहीं बनाई थी. उन्हें ईमेल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन बिल भुगतान से जुड़े खातों को उत्तराधिकारियों को सौंपने या बंद करने की प्रक्रिया की जानकारी भी नहीं थी. कुछ लोगों ने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं था, जबकि कुछ का मानना था कि पासवर्ड देना ही पर्याप्त होगा.हालांकि, डिजिटल संपत्ति का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए इससे कहीं अधिक तैयारी की जरूरत होती है.
पासवर्ड की सूची उत्तराधिकारियों को सौंपना
अध्ययन में शामिल ज्यादातर बुजुर्ग अपने पासवर्ड कागज पर लिखकर या डिजिटल फाइल में सुरक्षित रखते थे. लगभग सभी ने अपने कुछ पासवर्ड उन परिजनों के साथ साझा किए थे, जो उनके ऑनलाइन खातों का प्रबंधन करने में मदद करते थे. उन्हें भरोसा था कि उनकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी पासवर्ड की सूची ढूंढ लेंगे.
कई लोग अपनी मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थे. बार-बार पासवर्ड बदलने की अनिवार्यता के कारण सूची को अद्यतन रखना मुश्किल होता था. उन्हें आशंका थी कि उत्तराधिकारियों को खातों के नवीनतम पासवर्ड नहीं मिल पाएंगे.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ पासवर्ड मैनेजर के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. इनके जरिये सभी खातों के पासवर्ड सुरक्षित और अद्यतन रखे जा सकते हैं. कुछ पासवर्ड मैनेजर में आपातकालीन सुविधा भी होती है, जिसके तहत निर्धारित समय तक उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर नामित उत्तराधिकारी को खातों तक पहुंच मिल सकती है.
मास्टर पासवर्ड को किसी सुरक्षित स्थान पर लिखकर रखना भी उपयोगी हो सकता है. इससे दर्जनों पासवर्ड के बजाय केवल एक पासवर्ड का प्रबंधन करना होगा.
सिर्फ पासवर्ड से सभी खातों तक पहुंच संभव नहीं
किसी को पासवर्ड सौंप देना हमेशा खाते तक पहुंच सुनिश्चित नहीं करता. कई ऑनलाइन सेवाओं में दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) की व्यवस्था होती है. इसमें पासवर्ड के अलावा मोबाइल फोन या ईमेल पर भेजा गया कोड भी जरूरी होता है.ऐसे में यदि मृत्यु के बाद मोबाइल नंबर निष्क्रिय हो जाए या ईमेल खाता बंद हो जाए, तो उत्तराधिकारियों के लिए खाते तक पहुंच मुश्किल हो सकती है.
इससे बचने के लिए उन उपकरणों और खातों की पहचान जरूरी है, जिनका इस्तेमाल दूसरे खातों तक पहुंच बनाने में किया जा सकता है. उत्तराधिकारियों को निर्देश देना चाहिए कि अन्य खातों का निपटारा होने तक इन उपकरणों और खातों को सक्रिय रखें. इससे वे प्रमाणीकरण कोड प्राप्त करने के साथ जरूरत पड़ने पर पासवर्ड भी रीसेट कर सकेंगे.
कुछ ऑनलाइन सेवाएं ऐसी सुविधाएं भी देती हैं, जिनके जरिये उपयोगकर्ता अपनी मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति को खाता संभालने या डेटा प्राप्त करने के लिए नामित कर सकते हैं। फेसबुक और गूगल में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, सभी डिजिटल मंच यह विकल्प नहीं देते और अध्ययन में शामिल कई बुजुर्गों को यह जानकारी नहीं थी।
मृत्यु के बाद भी सक्रिय रह सकते हैं ऑनलाइन खाते
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके ऑनलाइन खाते अपने आप बंद नहीं होते. भले ही उनमें महत्वपूर्ण जानकारी न हो, हैकर उनका इस्तेमाल पहचान की चोरी, स्पैम और धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं.
इसके अलावा, स्ट्रीमिंग सेवाओं के मासिक शुल्क और पत्रिकाओं की वार्षिक सदस्यता जैसे स्वचालित भुगतान भी लंबे समय तक जारी रह सकते हैं। यदि उत्तराधिकारियों को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हों, तो वे यह तय नहीं कर पाते कि किन खातों को बंद करना है और किनका प्रबंधन जारी रखना है.
इसलिए सभी ऑनलाइन खातों की सूची तैयार कर उनके सामने स्पष्ट निर्देश लिखना जरूरी है. इसमें बताया जाना चाहिए कि किन खातों को सीधे बंद किया जा सकता है, किनके लिए अंतिम भुगतान जरूरी है और किन खातों के संबंध में अन्य कार्रवाई करनी होगी.समय-समय पर डिजिटल खातों की समीक्षा कर उन खातों को बंद कर देना चाहिए, जिनका अब इस्तेमाल नहीं किया जाता. इससे सूची को व्यवस्थित रखना आसान होगा.
पूर्व तैयारी से उत्तराधिकारियों की परेशानी होगी कम
किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन करना अनुमान से कहीं अधिक जटिल हो सकता है. इसलिए इसकी योजना पहले से बनाना जरूरी है.

