जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं. ये बदलाव उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं. ये बदलाव सेल रिन्यूअल में देरी, हड्डियों की डेंसिटी में कमी और हार्मोनल उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से होते हैं. हालांकि, महिलाओं के शरीर में और भी बड़े बदलाव होते हैं. खास तौर पर, टीनएज में जो पीरियड एक हफ्ते तक रहता था, वह धीरे-धीरे घटकर पांच दिन का हो जाता है. दस या पंद्रह साल बाद, यह अचानक घटकर सिर्फ दो या तीन दिन का हो सकता है. कई महिलाओं को लगता है कि यह एनीमिया या कुछ पोषक तत्वों की कमी के कारण है.
यह एक बहुत ही जरूरी और प्रैक्टिकल सवाल है. उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के पीरियड का छोटा होना बहुत आम है. जब टीनएज में पीरियड धीरे-धीरे 7 दिन से 5 दिन का और फिर सिर्फ 2 या 3 दिन का हो जाता है, तो चिंता होना स्वाभाविक है. महिलाएं अक्सर इसे एनीमिया या पोषक तत्वों की कमी मानती हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में, यह असली कारण नहीं होता है. आइए इसके पीछे के असली साइंटिफिक और फिजियोलॉजिकल कारणों को RISAA IVF की वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. रीता बख्शी से आसान और साफ तरीके से समझते हैं…
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रीता बख्शी बताती हैं कि पीरियड्स की अवधि का पांच दिन से घटकर दो दिन हो जाना जरूरी नहीं कि किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो. ब्लीडिंग की मात्रा में बदलाव होना काफी सामान्य है और यह उम्र, हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली जैसे कारकों पर निर्भर करता है. आमतौर पर, खून की कमी (एनीमिया) सीधे तौर पर मासिक धर्म चक्र को छोटा नहीं करती है. हालांकि, कुपोषण, थायरॉयड की समस्या, हार्मोनल असंतुलन और अत्यधिक तनाव जैसे कारक इस चक्र को प्रभावित कर सकते हैं. यदि यह बदलाव अचानक होता है और कई महीनों तक बना रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.
जब डॉ. रीता बख्शी से पूछा गया कि क्या मासिक धर्म चक्र (पीरियड्स) के सामान्य होने की संभावना है या यह हमेशा के लिए दो दिन का ही रहेगा, तो उन्होंने बताया कि अगर समय में कमी किसी अस्थायी वजह से हुई है, जैसे तनाव, अचानक वजन में बदलाव, या बुखार या बीमारी से ठीक होना, तो इन समस्याओं के ठीक होने पर चक्र के वापस अपने सामान्य पांच दिन के समय पर आने की संभावना होती है. साथ ही, उन्होंने कहा कि हर महिला का शरीर अलग होता है, जरूरी नहीं कि एक स्वस्थ मासिक धर्म चक्र पांच दिन का ही हो. अगर आपके पीरियड्स नियमित हैं और आपको कोई अन्य दर्द या परेशानी नहीं होती है, तो दो या तीन दिन तक ब्लीडिंग होना पूरी तरह से सामान्य माना जाता है.
क्या हमारी रोजमर्रा की आदतें भी पीरियड्स की अवधि में अचानक कमी के लिए जिम्मेदार हैं
डॉ. रीता बख्शी का कहना है कि इसके कारण हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली में ही छिपे हैं…
स्ट्रेस (तनाव): लगातार चिंता से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है और मासिक धर्म चक्र छोटा हो सकता है.
वजन में बदलाव: अचानक वजन कम होने या बढ़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है.
ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज: ऐसी एक्सरसाइज जिनसे शरीर पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, उनसे भी ब्लड फ्लो कम हो सकता है.
डाइट और नींद: पौष्टिक डाइट की कमी, पूरी नींद न लेना, और थायरॉइड या PCOS जैसी समस्याएँ भी इसके मुख्य कारण हैं.
इसलिए, हार्मोन को संतुलित रखने का एकमात्र तरीका है पौष्टिक आहार लेना, नियमित नींद लेना, हल्की-फुल्की कसरत करना और तनाव-मुक्त जीवनशैली अपनाना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर महीने में सिर्फ दो दिन ब्लीडिंग होती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि, अगर लगातार तीन महीनों से ज्यादा समय तक बहुत कम ब्लीडिंग हो रही है, तो आपको निश्चित रूप से डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए इसके अलावा, अगर आपको पेट में असहनीय दर्द, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, देर से या अनियमित पीरियड्स, असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज या गर्भधारण में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.
थायरॉइड या PCOS की समस्या से जूझ रही महिलाओं और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के करीब पहुंच रही महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. उनका कहना है कि अगर किसी भी समस्या का पता जल्दी चल जाए और उसका इलाज किया जाए, तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है.

