नई दिल्ली :- ब्रिटेन से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो ने संसद में देश के सबसे बड़े और खौफनाक ‘ग्रूमिंग गैंग्स स्कैंडल’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है. ब्रिटिश सांसद बीते सोमवार को वेस्टमिंस्टर हॉल में जमा हुए. इस दौरान उन्होंने ग्रूमिंग-गैंग से बचे लोगों की दिल दहला देने वाली गवाहियां सुनीं. पीड़ितों ने बताया कि कैसे ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के मर्दों ने उन्हें तस्करी, रेप और यातना का शिकार बनाया.एक पीड़ित की रिकॉर्ड की गई गवाही को ‘रिस्टोर ब्रिटेन’ के सांसद रूपर्ट लो ने पढ़कर सुनाया कि कैसे रेपिस्टों के एक गिरोह ने एक बार एक कमरे को कुत्तों से भर दिया था और इस बात पर शर्त लगा रहे थे कि क्या कुत्ते सचमुच रेप कर सकते हैं या नहीं.
एक कुत्ते ने मेरे साथ रेप किया
एक पीड़ित महिला ने बताया- ‘एक कुत्ते ने मेरे साथ रेप किया.’ एक अन्य पीड़ित ने बताया कि अपराधी लगभग पूरी तरह से गोरी लड़कियों को ही निशाना बनाते थे. एक और पीड़िता ने बताया कि तीन सालों में 600 या 700 मर्दों ने उसके साथ रेप किया और यह भयानक दौर तब शुरू हुआ, जब वह महज 13 साल की थी.एक दूसरी पीड़िता ने बताया कि 12 साल की उम्र में उसके साथ हुए रेप हुआ, हमलावरों ने उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल डाल दी और उसे तोड़ दिया. एक पीड़िता ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ रेप किया.
ईद और छुट्टियों के आस-पास बिगड़ते थे हालात
पीड़िता ने कहा कि गोरी लड़कियों की तस्करी बच्चों के घरों के जरिए की जाती थी ठीक उन्हीं संस्थानों के जरिए जिन्हें उनकी देखभाल के लिए बनाया गया था. उसने यह भी कहा, “ईद और छुट्टियों के आस-पास हालात और बिगड़ जाते थे. पार्टियां बड़ी हो जाती थीं, बदतर हो जाती थीं और ज्यादा हिंसक हो जाती थीं. ज्यादा लोग शामिल होते थे, ज्यादा लड़कियां शामिल होती थीं.”
एक पीड़ित ने गवाही देते हुए कहा, “लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं जिनसे यह लगता था कि गोरी लड़कियों और ईसाई लड़कियों को कम नैतिक या कम अहमियत वाला माना जाता है, जबकि कुछ पुरुष मुस्लिम लड़कियों को ज्यादा गरिमा और ऊंचे नैतिक स्तर वाला बताते थे. इन तुलनाओं का इस्तेमाल मेरे साथ किए जा रहे बर्ताव को सही ठहराने और मुझे जलील करने तथा मुझ पर काबू पाने के लिए किया जाता था.
बता दें कि सांसद लो ने एक याचिका के साथ इस बहस की शुरुआत की, जिस पर 2.6 लाख हस्ताक्षर मिले थे. इस याचिका में परिषदों, पुलिस, क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस और अन्य संस्थानों के लिए एक कानूनी अनिवार्यता की मांग की गई थी कि वे बच्चों को निशाना बनाने वाले यौन अपराधियों की राष्ट्रीयता, जातीयता, इमिग्रेशन की स्थिति और धर्म का पता लगाएं और उसे दर्ज करें.
पाकिस्तानी मूल के थे शोषण करने वाले
वहीं सांसद सारा चैंपियन ने कहा, “रोदरहैम के मामले में जो गिरोह मेरे निर्वाचन क्षेत्र में छोटे बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका शोषण कर रहे थे वे मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के थे. यह बात इसलिए मायने रखती है, क्योंकि अगर हमने इसे शुरू में ही पहचान लिया होता तो शायद हम इस शोषण को रोक पाते और इसमें बाधा डाल पाते.

