छत्तीसगढ़:- 16 जून से नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत होने जा रही है। समस्त विद्यालयों में शाला प्रवेश उत्सव मनाने की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, किंतु पंडरिया विकासखंड के ग्रामीण अंचलों से आ रही तस्वीरें शासकीय दावों की जमीनी हकीकत को बयां करती हैं। विकासखंड के कई गांवों में आज भी विद्यार्थी जर्जर शाला भवनों अथवा अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत पंचायत भवनों में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व इन असुरक्षित परिसरों को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई हैं।
आठ वर्षों से पंचायत भवन के भरोसे शिक्षा
ग्राम पंचायत सूरजपुर के आश्रित ग्राम रेहुटा का प्राथमिक शाला भवन विगत कई वर्षों से पूर्णतः अनुपयोगी हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण बीते आठ वर्षों से बच्चों की कक्षाएं ग्राम पंचायत के भवन में संचालित की जा रही हैं। यही स्थिति ग्राम पंचायत सैहामालगी में भी बनी हुई है, जहां मुख्य शाला भवन के अनुपलब्ध होने के कारण पंचायत भवन को ही विद्यालय का विकल्प बनाया गया है। यही हाल दुल्लीपार और नवापारा जैसे आश्रित ग्रामों का है। नवापारा के ग्रामीणों का कहना है कि छात्र संख्या कम होने का तर्क देकर नवीन भवन की स्वीकृति को लंबे समय से टाला जा रहा है।
करा रहे सर्वे, जर्जर भवनों में शिक्षा नहीं
कबीरधाम के जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा ने कहा कि जिले के समस्त जर्जर व असुरक्षित शाला भवनों का नए सिरे से भौतिक सर्वे कराया जा रहा है। आगामी सत्र में किसी भी विद्यार्थी की जान जोखिम में डालकर जर्जर भवनों में कक्षाएं नहीं लगाई जाएंगी। ऐसे प्रभावित स्कूलों को तत्काल समीप के सुरक्षित शासकीय परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा और नए भवनों के निर्माण हेतु प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया जाएगा।

