दुर्ग :- छत्तीसगढ़ के संभाग स्तरीय और प्रदेश में नंबर वन का तमगा हासिल करने वाले दुर्ग जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.अस्पताल में पिछले कई दिनों से एक्स-रे फिल्म खत्म होने के कारण रोजाना करीब 300 से 400 मरीजों को बिना एक्सरे के लौटना पड़ रहा है. दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब मरीजों के सामने अब निजी सेंटर में महंगा एक्स-रे कराने की मजबूरी है.
पूरे संभाग से आते हैं मरीज
दुर्ग जिला अस्पताल में संभागभर से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं.अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक यहां सालाना करीब डेढ़ से दो लाख एक्स-रे किए जाते हैं. इसके बावजूद एक्स-रे फिल्म का स्टॉक खत्म होना अस्पताल की तैयारी और व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. दुर्ग निवासी कलीम कुरैशी अपने 8 साल के बेटे के गले में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे.
अब कलीम कुरैशी के परिवार के सामने निजी सेंटर में जांच कराने का आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. मामले को लेकर ऑल इंडिया फेडरेशन ने दुर्ग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था सुधारने की मांग की है.वहीं, सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज का कहना है कि फिल्म के लिए मांग भेजी गई है.जल्दी ही आपूर्ति होने पर सेवा शुरु हो जाएगी.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल प्रबंधन को मरीजों की संख्या और सालाना एक्स-रे की खपत का अनुमान है, तो स्टॉक खत्म होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? कागजी प्रक्रिया और एनओसी के बीच सबसे ज्यादा परेशानी उस गरीब मरीज को उठानी पड़ रही है, जिसके लिए निजी जांच का खर्च बड़ी चुनौती है.

