बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के च्वाइस सेंटर संचालकों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मामले में रायपुर निवासी दो आरोपियों अंकित आहूजा और आशीष केवटवानी को गिरफ्तार किया है. आरोपियों पर बिलासपुर सहित रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनके आधार पर धोखाधड़ी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये बताई गई है. आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल की गई एक बोलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं.
अलग-अलग जिलों में बनाते थे शिकार
मामले मे एएसपी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि पूछताछ में आरोपी अंकित आहूजा ने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर वारदात करना स्वीकार किया.अंकित अलग-अलग च्वाइस सेंटरों में जाकर संचालकों के क्यूआर कोड की तस्वीर अपने साथी को भेजता था. इसके बाद आशीष उस क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि अंकित संचालक से नकद रकम लेकर निकल जाता था. संचालकों के बैंक खाते होल्ड होने पर उन्हें पता चलता था कि उनके खाते में आई रकम साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी है.
कैसे देते थे धोखाधड़ी को अंजाम
मामले मे सबसे पहले बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत से हुई. शिकायत के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक व्यक्ति बोलेनो कार से सेंटर पहुंचा. उसने खुद को मोबाइल फोन-पे लेनदेन से जुड़ा बताते हुए क्यूआर कोड के बदले नकद रकम देने की बात कही. संचालक की सहमति मिलने पर आरोपी क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में लेकर चला गया. इसके बाद क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये का लेनदेन किया गया. संचालक को रकम मिलने के बाद अगले दिन उसके बैंक खाते पर होल्ड लग गया. बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि उसका फोन-पे खाता साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले में होल्ड किया गया है.

