घरघोड़ा : जशपुर जिला मुख्यमंत्री का पैतृक जिला होने के वावजूद भी शिक्षा विभाग की मारा मारी व उठापटक के कारण विभाग शुर्खियो में है। पूर्व में पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी एस एन पांडा को आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल की भर्ती में अनियमितता के कारण निलंबित किया गया था। जब जे के प्रसाद को पदस्थापित किया गया तो अनुकंपा नियुक्ति के मामले में विधानसभा में सवाल उठाया गया और अंततः प्रसाद भी निलंबित हुए।
फिर जिला शिक्षा अधिकारी बनकर आई मधुलिका तिवारी कुछ महीने बाद जे के प्रसाद उच्च न्यायलय से स्टे लेकर दुबारा फिर से जशपुर जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में ज्वाइन किए बाद में उनका स्थानांतरण अन्यत्र कर दिया गया। फिर संजय गुप्ता को जिला शिक्षा अधिकारी बनाकर जशपुर में नियुक्त किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को देखकर ऐसा महसूस होता है की संजय गुप्ता एक कर्तव्यनिष्ठ और बेहतरी अनुशासन प्रिय अधिकारी है उनके कार्यकाल में कार्यालय बेहतरीन ढंग से संचालित हो रहा था।
तब से लेकर आजतक जिला शिक्षा अधिकारी कर्यालय प्रभारी के भरोसे अनाथ जैसा हो गया है। पिछले लगभग आठ महीने से जिला कलेक्टर ने जिला मिशन समन्वयक राजीव गांधी शिक्षा मिशन नरेंद्र सिंह को जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंपा है। तब से आज दिनांक तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय प्रभारी के भरोसे ही है। कुछ महीने पहले एम जेड यू सिद्दीकी को पिछली सरकार ने डी ई ओ नियुक्त किया था। लेकिन उनकेखिलाफ हो रही जांच को देखते हुए जिला कलेक्टर ने उन्हें चार्ज देने से इंकार करते हुए।
आरा में प्राचार्य के पद पर नियुक्ति दी थी। जांच समाप्त होने पर एम जेड यू सिद्दीकी ने जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यभार ग्रहण कर नरेंद्र सिन्हा को कार्यमुक्त कर दिया है। लेकिन अभी भी नरेंद्र सिन्हा ही जिला शिक्षा अधिकारी का कार्य जिला प्रशासन के सह पर देख रहे है। अभी जिला के शिक्षा विभाग के कर्मचारी समझ नही पा रहे है की वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी कौन है। जिले में शिक्षा का हाल बेहाल है। पूरे समाज को शिक्षित करने वाला विभाग खुद अशिक्षित जैसा व्यवहार करके समाज को क्या संदेश दे रहा है। आज ये दक्ष प्रश्न पूरे समाज के सामने मुंह बाए खड़ा है।
