रायपुर:- छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का फैसला लिया है। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। समिति के सदस्यों का चयन मुख्यमंत्री करेंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि यूनिफॉर्म सिविल कोड आखिर है क्या? इससे प्रदेश के लोगों में क्या असर होगा और सरकार इसे क्यों लागू करने जा रही है?
दरअसल, छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड का संविधान में प्रावधान
यूनिफॉर्म सिविल कोड में सभी धर्मों, समुदायों के लिए एक सामान, एक बराबर कानून बनाने की कही गई है। आसान भाषा में बताया जाए तो इस कानून का मतलब है कि देश में सभी धर्मों, समुदाओं के लिए कानून एक समान होगा। मजहब और धर्म के आधार पर मौजूदा अलग-अलग कानून एक तरह से निष्प्रभावी हो जाएंगे। यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत आती है। इसमें कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। इसी अनुच्छेद के तहत इस यूनिफॉर्म सिविल कोड को देश में लागू करने की मांग की जा रही है। इसके पीछे जनसंख्या की को बिगड़ने से रोकना और जनसांख्यिकी को नियंत्रित करने की तर्क दी जाती है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड
विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति में सभी के लिए एक नियम।
परिवार के सदस्यों के आपसी संबंध और अधिकारों में समानता।
जाति, धर्म या परंपरा के आधार पर नियमों में कोई रियायत नहीं।
किसी भी धर्म विशेष के लिए अलग से कोई नियम नहीं।
UCC हो लागू तो क्या होगा?
UCC के तहत शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने जैसे मामले।
हर धर्म में शादी, तलाक के लिए एक ही कानून।
जो कानून हिंदुओं के लिए, वहीं दूसरों के लिए भी।
बिना तलाक के एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे।
शरीयत के मुताबिक जायदाद का बंटवारा नहीं होगा।
UCC लागू होने से क्या नहीं बदलेगा
धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं।
धार्मिक रीति-रिवाज पर असर नहीं।
ऐसा नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे।
खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर प्रभाव नहीं।

