कांकेर:- आमतौर पर आपने मंदिरों में शिवलिंग के सामने नंदी बाबा को विराजमान देखा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के कांकेर में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां नंदी भगवान शिव के ऊपर विराजमान हैं. यही अनोखी संरचना इस मंदिर को देश के दूसरे शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है. सावन के महीने में यहां आस्था का ऐसा रंग देखने को मिलता है कि दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.
यहां बदली हुई है शिव और नंदी की परंपरागत स्थिति
कांकेर शहर में स्थित नंदीश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच अपनी अनूठी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. सामान्य तौर पर शिव मंदिरों में नंदी को शिवलिंग के सामने स्थापित किया जाता है, लेकिन यहां नंदी बाबा शिवलिंग के ऊपर विराजमान दिखाई देते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, देश में इस तरह की अनोखी शिव प्रतिमा केवल दो स्थानों पर होने की बात कही जाती है कि एक आंध्र प्रदेश में और दूसरा छत्तीसगढ़ के कांकेर में है.
ध्यान लगाने से आते हैं नजर
श्रद्धालु बताते हैं कि स्वयंभू शिवलिंग है और शिवलिंग को ध्यान से देखने पर नंदी जी छोटे से बछड़े के रूप में दिखते हैं. छोटी सी पूंछ, छोटे घुंघुरू बिल्कुल नंदी महाराज की तरह. पुजारी भी कहते हैं कि नंदी को हम तभी जानेंगे, शिव को हम तभी पहचानेंगे जब हम उनमें लगे रहेंगे.
सावन में बढ़ जाती है रौनक
सावन आते ही नंदीश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. सुबह से ही भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगते हैं. मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते हैं. मान्यता है कि सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भोलेनाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
सावन का पावन महीना
सावन का महीना सबसे पवित्र महीना माना जाता है सावन के इस महीने में माता पार्वती ने भी उपासना की थी अपना व्रत पूरा किया था और इसी महीने में समुद्र मंथन भी हुआ था, माना जाता है अपनी मनोकामनाओं के लिए अच्छा वर पाने के लिए लड़कियां पूजा करती हैं.
महानदी से जल लेकर पहुंचते हैं कांवड़िए
नंदीश्वर महादेव मंदिर की कांवड़ यात्रा भी यहां की खास पहचान है. हर साल श्रद्धालु सरंगपाल स्थित महानदी से कांवड़ में जल भरकर पदयात्रा करते हैं और नंदीश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान पूरा माहौल शिवमय हो जाता है. श्रद्धालु रास्तेभर भगवान शिव का जयघोष करते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं और फिर पवित्र जल से महादेव का अभिषेक करते हैं.

