सरगुजा:- शादी विवाह का सीजन शुरू हो चुका है, अलग अलग सामाजिक परम्परा में शादियां हो रही हैं, लेकिन इस बार सरगुजा में बड़ी ही अनोखी शादी हुई है, सारी परम्पराओं को किनारे रखकर दो परिवार ने मानवता और रिश्तों को आगे रखकर अपनी अलग परम्परा पेश की है. इस शादी की खास बात यह है की विदाई दुल्हन की नहीं बल्कि दूल्हे की हुई है. बारात भी दुल्हन लेकर पहुंची. भावुक करने वाला नजारा तो तब हुआ जब विदाई के वक्त दुल्हन की तरह दूल्हा रोते हुए नजर आया, आइये जानते हैं इस अजब गजब वैवाहिक परम्परा के पीछे वजह क्या है.
घर जमाई बना दूल्हा
दरअसल, जिले के मैनपाट क्षेत्र के सुपल्गा क्षेत्र में एक विवाह गुरुवार को संपन्न हुआ. इस विवाह में दुल्हन बारात लेकर पहुंची दूल्हे की विदाई कराई गई. अब विवाह के बाद दूल्हा घर जमाई बनकर अपनी ससुराल में रहेगा. ये पूरी रस्म आपसी रजामंदी से संपन्न कराई गई.
दुल्हन के पिता का कोई बेटा नहीं है
ऐसा अजीब विवाह इसलिए हुआ क्योंकि दुल्हन का एक भी भाई नहीं है, पिता खेती किसानी का काम करते हैं. ऐसे में दुल्हन के पिता एक बेटे की तलाश में थे. इधर जब उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता बरवा परिवार से किया तो ये बातें रखी गई. जिसके बाद दोनों परिवार आपसी रजामंदी से लड़के के घर जमाई बनने को तैयार हुए. इसके बाद शादी में अनोखी रस्में निभाई. दुल्हे की जगह दुल्हन बारात लेकर आई और दूल्हे की देर शाम विदाई की गई. अब दूल्हा अपने ससुर के साथ रहेगा और उनको बेटे का सुख मिल सकेगा.
मेरे घर में चार बेटियां हैं एक भी बेटा नहीं है, इसलिए ऐसा कदम उठाया गया यह फैसला भले समाज को अलग लगे, लेकिन मेरे परिवार के लिए यह जरूरी था– दुल्हन के पिता मोहन एक्का
दुल्हन के पिता मोहन एक्का ने यह भी कहा कि दूल्हे को अपने घर ले जा रहे हैं और इसे बेटे की तरह रखेंगे. शादी पूरी तरह उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही हो रही है.

