रायपुर :- रायपुर विकास प्राधिकरण की लाभांडी-कचना-सडडू नगर विकास योजना के अंतर्गत आबंटित किए जाने वाले भू-खंडों की जानकारी प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के बाद योजना में भू-खंडों के आबंटन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला
रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि योजना के अंतर्गत एक मंत्री की पत्नी की कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड, जिसका पंजीकृत कार्यालय नयापारा टेलीफोन एक्सचेंज के पास, जगदलपुर में बताया गया है और जिसमें मंत्री की पत्नी निदेशक हैं तथा उनके नाम 80 हजार रुपये के शेयर हैं, को सडडू में मुख्य चौराहे से कुछ ही दूरी पर 2168 वर्ग मीटर अर्थात 23,327 वर्गफीट का प्लॉट क्रमांक 25 आबंटित किया जा रहा है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, यह प्लॉट प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी सड़क एमआर-43 पर स्थित है और सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र में भूमि का मूल्य लगभग 10 हजार रुपये प्रति वर्गफीट हो जाएगा अर्थात प्लाट कम से कम लगभग 20 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। मंत्री ने 2023 के चुनाव में दिए शपथ पत्र में भी पत्नी के नाम से राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में 80 हजार रुपये जमा राशि बताई है।
डॉ. गुप्ता ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि भू-खंडों के आबंटन में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है तथा प्रभावशाली व्यक्तियों सहित कई अन्य लोगों को योजना में अत्यंत मूल्यवान भू-खंड आवंटित किए गए हैं। उनका कहना है कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की लगभग 1.33 एकड़ भूमि कचना के नालापारा क्षेत्र में स्थित है, जिसका पहुंच मार्ग बस्ती के संकरे रास्ते से होकर जाता है। उनके अनुसार, इसी कारण इस भूमि का कोई खरीदार नहीं था और उसका मूल्य भी कुछ लाख तक ही सीमित था।
डॉ. गुप्ता का आरोप है कि रायपुर विकास प्राधिकरण ने राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की नालापारा में स्थित इस भूमि को नगर विकास योजना में शामिल करने के लिए बीच में आने वाली अन्य निजी भूमियों को भी योजना में शामिल करना पड़ा। उनके अनुसार, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना स्थित भूमि को प्लॉट क्रमांक 71 दिया गया है, जिसे सार्वजनिक सुविधा/पब्लिक एमेनिटी के लिए आरक्षित बताया गया है।करने के लिए बीच में आने वाली अन्य निजी भूमियों को भी योजना में शामिल करना पड़ा। उनके अनुसार, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना स्थित भूमि को प्लॉट क्रमांक 71 दिया गया है, जिसे सार्वजनिक सुविधा/पब्लिक एमेनिटी के लिए आरक्षित बताया गया है।
कचना में जमीन – प्लाट मिला सडडू में
डॉ. गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii)(f) और (g) में अंतिम भू-खंड अर्थात दिए जाने वाले फाइनल प्लाट के संबंध में यह प्रावधान है कि भू-स्वामी को पुनर्गठित अंतिम भू-खंड, अर्थात फाइनल प्लॉट, उसकी मूल भूमि में अथवा उससे लगे किसी भू-खंड में दिया जाए। उनका आरोप है कि इसके विपरीत राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना स्थित भूमि के बदले सडडू में भू-खंड दिया जा रहा है, जो मूल भूमि से एक किलोमीटर दूर है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन भू-स्वामियों को प्रस्तावित एमआर-43 जैसी प्रमुख सड़क पर भू-खंड मिलने थे, लेकिन जो प्रभावशाली नहीं थे, उन्हें वहां से हटाकर योजना के अपेक्षाकृत अंदरूनी और कम मूल्य वाले स्थानों पर भू-खंड दिए गए हैं। उनके अनुसार, इससे योजना में भू-खंडों के पुनर्गठन और आबंटन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर उन्होंने मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर लाभांडी-कचना- सडडू नगर विकास योजना को निरस्त करने तथा पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

