जयपुर:- ग्रामीण जिले के माधोराजपुरा थाना क्षेत्र के दौसरा गांव में एक गर्भवती महिला की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात का महज चार घंटे में खुलासा करते हुए मृतका के पति और उसकी कथित प्रेमिका को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रेम प्रसंग के चलते आरोपी प्रेमिका ने महिला को चाय पीने के बहाने घर बुलाकर पहले नशीली गोली दी और फिर कुल्हाड़ी से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को छिपाने में मृतका के पति ने भी उसका साथ दिया।
चाय पीने के बहाने बुलाया था घर
पुलिस अधीक्षक जयपुर ग्रामीण हनुमान प्रसाद ने बताया कि 10 जून को दौसरा निवासी गोवर्धन गुर्जर ने माधोराजपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके छोटे भाई शंकरलाल की पत्नी सम्पत देवी गर्भवती थी और 9 जून को घर पर अकेली थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली भावना जाट उसे चाय पीने के बहाने अपने घर ले गई। वहां उसकी हत्या कर शव को घर में ही छिपा दिया गया।
घर में मृत मिली महिला
परिजनों को घटना की जानकारी तब हुई जब अगले दिन सुबह आरोपी भावना के पिता गणेश जाट ने उन्हें बताया कि सम्पत देवी उनके घर में मृत अवस्था में पड़ी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दूदू शिवलाल बैरवा और फागी वृत्ताधिकारी अनिल कुमार डोरिया के निर्देशन में थानाधिकारी रणधीर सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, आसपास के लोगों से पूछताछ की तथा तकनीकी और आसूचना तंत्र की मदद से साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान पुलिस को मृतका के पति शंकरलाल और पड़ोस में रहने वाली भावना पर संदेह हुआ। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें पूरे हत्याकांड का खुलासा हो गया।
चाय में नशीली गोली मिलाकर किया बेहोश
पुलिस पूछताछ में भावना ने स्वीकार किया कि वह शंकरलाल से प्रेम करती थी। इसी वजह से उसने शंकरलाल की पत्नी सम्पत देवी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। योजना के तहत उसने सम्पत देवी को अपने घर बुलाया और पानी में नशीली गोली मिलाकर पिला दी। महिला के बेहोश होने के बाद कुल्हाड़ी के पिछले हिस्से से उसके सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई।
शव को तिरपाल से लपेटा
हत्या के बाद भावना ने अपने प्रेमी शंकरलाल को फोन कर बुलाया। दोनों ने मिलकर शव को प्लास्टिक के तिरपाल में लपेटा और कट्टों व अनाज की बोरियों के बीच छिपा दिया, ताकि किसी को वारदात की भनक न लगे।

