जांगगीर चांपा:- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राछा पोड़ी गांव के दौरे पर रहेंगे. अपने दौरे पर सीएम बाबा कबड्डी दास से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लेंगे. सीएम के आगमन को लेकर आश्रम में सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. सीएम के स्वागत के लिए आश्रम को दुल्हन की तरह सजाया गया है. राछा गांव में बाबा कबड्डी दास जी का सत्य निज नाम आश्रम है. यहां आयोजित किए जा रहे सत्संग में सीएम सहित कई मंत्री शामिल होंगे. सीएम इस मौके पर जांजगीर चांपा जिले के विकास के लिए करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे. आयोजन स्थल के पास ही सीएम के हेलीकॉप्टर को उतारने के लिए हेलीपैड बनाया गया है.
जानिए कौन हैं बाबा कबड्डी दास जी
जांजगीर चाम्पा जिला के नवागढ़ ब्लाक में राछा पोड़ी गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे बाबा कबड्डी दास शुरू से ही धार्मिक विचारधारा के रहे. गांव में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में वो देवताओं का रोल अदा करते थे, लेकिन एक दिन उनके मन में बड़ा परिवर्तन आया और उन्होंने मूर्ति पूजा के बजाए स्वयं की उपासना करना शुरू कर दिया.
बाबा ने शुरू की स्वंय की पूजा
कबड्डी दास बाबा ने बताया कि उनके इस स्वभाव का गांव वालों ने उपहास उड़ाया और उनको पागल तक कहने लगे. बाबा बताते हैं कि उन्होने आगे चलकर नशा मुक्ति के खिलाफ अभियान चलाया और उसकी शुरूआत उन्होने अपने ही घर से की. बाबा ने लोगों को समझाया कि नशा कैसे इंसान के मन और शरीर दोनों का नाश करता है. बाबा कहते हैं कि धीरे धीरे कर उनका अभियान बढ़ता चला गया और वो छत्तीसगढ़ के साथ दूसरे जिलों में भी फैल गया. लोग सत्य निज नाम के प्रचार प्रसार से जुड़ने लगे. गांव के लोग कहते हैं कि बाबा कबड्डी दास अपने शिष्यों से कुछ भी नहीं लेते हैं. बाबा का कहना है कि उनको कुछ नहीं चाहिए बस लोग मांस, मदिरा और बुरे व्यवहार छोड़ दें. बाबा लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी दिलाते हैं.
सत्य निज नाम आश्रम की स्थापना, साल में एक बार देखते हैं खास आईना
सत्य निज नाम आश्रम के सचिव ने बताया कि इस आश्रम से जुड़ने के लिए किसी भी तरह से कोई बंधन नहीं है, सभी जाति वर्ग के लोग जुड़ सकते हैं, सिर्फ अपनी गलत आदतों को छोड़ने के बाद अपनी आत्मा की ही आराधना करने की सलाह बाबा देते हैं. आश्रम के कर्मचारी बताते हैं कि आश्रम में एक दर्पण लगा हुआ है जो साल में सिर्फ एक बार 17 नवंबर को खुलता है. आश्रम के सभी शिष्य उस दिन आइने में अपना चेहरा देखते हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का प्रण लेते हैं. आश्रम के सचिव कहते हैं कि शरीर और आत्मा को स्वच्छ बनाने के लिए साल में एक दिन आइना देखा जाता है.

