कबीरधाम :- कवर्धा राजपरिवार में शाही दशहरा मनाया जा रहा है. शाही दशहरा की परंपरा 274 साल पुरानी है. वर्ष 1751 में कवर्धा राज परिवार की राजगद्दी की स्थापना हुई थी. तब महाराज स्वर्गीय महाबली सिंह ने इस परंपरा की शुरुआत की थी,जो आज भी कायम है. पुराने जमाने से दशहरा के दौरान राजा ठाठ बाट से रथ लेकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं. इस दौरान बग्गियों को विशेष रूप से सजाया जाता है.
274 साल पुरानी है परंपरा
जब राजा सज धजकर बग्गियों में जनता के बीच आते है तो उनके दर्शन करने लोगों भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि दशहरा के दिन राजा का दर्शन करना शुभ माना जाता है. इसलिए दशहरे पर कवर्धा समेत के दूर-दराज के हजारों लोगों की भीड़ जुटती है. 274 साल बाद भी यह परंपरा आज भी कायम है.
क्या-क्या होगा कार्यक्रम
कवर्धा स्टेट के राजा योगेश्वर राज सिंह, राजकुमार मैकलेश्वर राज सिंह शाम होते ही मोती महल से शाही रथ में सवार होकर नगर भ्रमण करने निकलेंगे.इस दौरान लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए आगे बढ़ेंगे. जैसे ही महल दरबार हाल से राजा निकलते हैं महल परिसर में एकत्रित विशाल जन समूह दर्शन कर उनका जयकारा लगाते हैं.
कबीरधाम में शाही दशहरा की परंपरा
इतिहास के जानकार आदित्य श्रीवास्तव बताते हैं कि शाही दशहरे की परंपरा महाराजा महाबली के समय से चली आ रही है. विजयदशमी की सुबह रियासत के प्रमुख राजा और राजकुमार स्नान करके पाली पारा स्थित अपने कुल देवी दंतेश्वरी मंदिर समेत नगर के प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन करने जाते हैं. जिसके बाद राज महल पहुंच कर शस्त्र पूजन करते हैं.
सरदार पटेल मैदान में जलेगा रावण
शाम लगभग 5 बजे राजा का शाही रथ राज महल से निकल कर बैंड-बाजा के साथ सरदार पटेल मैदान पहुंचेगा. जहां बालक रुपी भगवान राम लक्ष्मण राज परिवार की ओर से बनाए गए 35 फीट रावण का दहन करते हैं. फिर विजय रथ नगर भ्रमण कर लोगों की खुशहाली , तरक्की की कामना की जाएगी. इस दौरान हजारों की भीड़ राजा के दर्शन करने पहुंचते हैं, भ्रमण के बाद राजा राज महल में दरबार लगाते हैं. जहां राजा से नगरवासी भेंट करते हैं. राजा सभी का अभिवादन स्वीकार करते है.

