नई दिल्ली:- देश की कर व्यवस्था को अधिक सुगम और व्यवसायों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में आगामी 1 नवंबर से कई महत्वपूर्ण सुधार लागू होने की संभावना है. सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए व्यापार को आसान बनाना, रिफंड प्रक्रियाओं में तेजी लाना और कर अनुपालन के बोझ को कम करना है. हाल ही में आयोजित जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में इन प्रशासनिक और कानूनी सुधारों को हरी झंडी दी गई थी.
दो चरणों में लागू होंगे नए नियम
अधिकारियों के मुताबिक, इन सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. प्रशासनिक स्तर पर किए जाने वाले बदलाव 1 नवंबर, 2026 से प्रभावी हो जाएंगे, जबकि जीएसटी कानून में संशोधन की आवश्यकता वाले प्रस्तावों को 1 अप्रैल, 2027 से अनिवार्य किया जाएगा. विधि विभाग की मंजूरी के बाद इनसे संबंधित आधिकारिक अधिसूचनाएं और दिशा-निर्देश शुक्रवार तक जारी होने की उम्मीद है.
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए बड़ी सुगमता
इस सुधार का सबसे बड़ा लाभ देश के करीब 9.5 लाख छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को मिलेगा. नए नियमों के तहत, यदि कोई छोटा विक्रेता कई राज्यों में अपना सामान बेचना चाहता है, तो उसे हर राज्य में भौतिक कार्यालय खोलने की आवश्यकता नहीं होगी. वह संबंधित राज्य में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे एमेज़न, फ्लिपकार्ट आदि) के गोदाम को ही अपना मुख्य कारोबारी स्थल घोषित कर सकेगा.
इसके लिए विक्रेता को किसी एक राज्य में अपना भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण पूरा करना होगा, जिसके बाद वह अन्य राज्यों में गोदाम की सहमति से आसानी से पंजीकरण करा सकेगा.इसके साथ ही, जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जा रहा है. आवश्यक दस्तावेजों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिससे अधूरी जानकारी के कारण आवेदन खारिज होने या बार-बार स्पष्टीकरण मांगे जाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी.
रिफंड प्रक्रिया में तेजी और मुकदमों से राहत
करदाताओं के लिए नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए रिफंड सिस्टम को तेज किया जा रहा है. इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का रिफंड अब पूरी तरह ऑटोमैटिक (स्वचालित) होगा. इसके अलावा, शून्य-दर आपूर्ति और उलट शुल्क संरचना के मामलों में, जोखिम मूल्यांकन के आधार पर 90 प्रतिशत रिफंड राशि अस्थायी रूप से तुरंत मंजूर कर दी जाएगी. रिफंड आवेदनों की समीक्षा और कमियों की जानकारी देने की समयसीमा को भी 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है.

