दुर्ग:- शारदीय नवरात्रि का आज तीसरा दिन है और माता रानी के पावन पर्व पर हर मंदिर देवालओं में भक्तों की भीड़ उमड़ रही हैं। शहर से लेकर गांव तक मां जगत जननी के उपासक आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि को लेकर हर तरफ उत्साह और भक्ति देखने को मिल रही है। ऐसी भक्ति दुर्ग जिले में देखने को मिली है। जहां एक कुंवारी माता वैष्णवी करती करती है। बताया जा रहा है कि वैष्णवी नवरात्रि के नौ दिनों तक कठिन अराधना करती है। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।
कातरों गांव में माता की चौकी
मिली जानकारी के अनुसार, दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर कातरो गांव में कुंवारी माता के नाम से पहचानी जाने वाली वैष्णवी ने पेट में जवारा बोया है। बताया जा रहा है कि कुंवारी माता द्वारा इस तरह की कठोर साधना करना श्रद्धालुओं के लिए गहरे कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बना रहता है। नौ दिनों तक बिना अन्न और जल (निर्जला व्रत) ग्रहण किए, नुकीली कीलों के पलंग पर स्थिर लेटे रहना शारीरिक सहनशीलता और मानसिक दृढ़ता की पराकाष्ठा मानी जाती है। पेट पर जलते हुए अखंड ज्योति कलश को स्थापित रखना और नौ दिनों तक देह को बिना हिलाए-डुलाए संतुलित रखना योग साधना का बेहद कठिन अभ्यास है।
भक्ति के आगे परिजन भी नतमस्तक
छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालु कुंवारी माता के प्रति अटूट समर्पण और देवी का साक्षात भाव मानकर दर्शन और मंगलकामना के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। जब बचपना पढ़ाई और खेलकूद में रहता है तब कुंवारी माता महज देवी देवताओं की पूजा में लीन रहती थी, परिजनों ने खूब समझाया लेकिन कुंवारी माता की भक्ति के आगे परिजन भी नतमस्तक हो गए।
काटों वाले झूले पर झूलती हैं माता
नवमी के अंतिम दिन कुंवारी माता कीलों के झूले पर कभी बैठकर तो कभी खड़े होकर झूला झूलती है। इस दौरान जो भी भक्त कुंवारी माता को देखता है वो पल भर के लिए हैरान हो जाता है। यहां आने वाले भक्तों ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें कुंवारी माता की जानकारी मिली.इसके बाद महाराष्ट्र से दुर्ग कातरों गांव पहुंचे। जहां कुंवारी माता पेट पर ज्योति ज्वारा स्थापति की हैं।

