खांसते या छींकते समय अनजाने में पेशाब का निकलना सामान्य बात नहीं है. यह एक आम मेडिकल स्थिति है जिसे ‘स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस’ (SUI) कहा जाता है. यह समस्या कई लोगों, खासकर महिलाओं को प्रभावित करती है. यह तब होता है जब खांसने, छींकने, हंसने या शारीरिक गतिविधि जैसी क्रियाओं से पेट का दबाव बढ़ता है, जिससे अनजाने में पेशाब निकल जाता है. हालांकि यह स्थिति शर्मनाक और असहज हो सकती है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि इसके लिए असरदार इलाज और मैनेजमेंट के विकल्प मौजूद हैं.
यह पूरी तरह से गलतफहमी है कि ‘स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस’ और पेल्विक फ्लोर की समस्याएं केवल उम्रदराज महिलाओं को ही प्रभावित करती हैं. असल में, ये समस्याएं किसी भी उम्र की महिलाओं को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें युवा महिलाएं, किशोरी बालिकाएं और एथलीट भी शामिल हैं.
बेंगलुरु के मदरहुड हॉस्पिटल की एक रिपोर्ट, जिसका शीर्षक ‘द मसल नो वन मेंशन्स’ है, से पता चलता है कि युवा लड़कियों और युवा महिलाओं में भी ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं. यह रिपोर्ट अस्पताल के गायनेकोलॉजी, फर्टिलिटी और फिजियोथेरेपी विभागों के डेटा पर आधारित है.
बढ़ते मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के आउटपेशेंट विभागों में हर महीने पेल्विक फ्लोर से जुड़े 20 से ज्यादा मामले सामने आते हैं. इनमें से अधिकांश मामले ऐसी महिलाओं के होते हैं जिन्हें डिलीवरी के बाद ‘स्ट्रेस इनकंटीनेंस’ (पेशाब पर नियंत्रण न रख पाना) की समस्या होती है. हर महीने लगभग 10 महिलाएं (जिनकी उम्र 25 से 35 साल के बीच है) इस समस्या के इलाज के लिए आती हैं.
हर महीने, पांच से दस लोग लगातार पेल्विक पेन (पेट के निचले हिस्से में दर्द) और सेक्स के दौरान दर्द की शिकायत लेकर आते हैं. इनमें से दो या तीन महिलाएं मेनोपॉज से गुजर चुकी होती हैं, और एक या दो को यूटेराइन प्रोलैप्स (गर्भाशय का खिसकना) की समस्या होती है.
इसके अलावा, हर महीने पेशाब न रोक पाने के पांच से दस मामले सामने आते हैंच पेशाब न रोक पाने वाली महिलाओं में से 80 प्रतिशत 25 से 35 साल की युवा महिलाएं होती हैं. आंकड़े यह भी बताते हैं कि इनमें से केवल 20 प्रतिशत महिलाएं ही 50 साल से ज्यादा उम्र की होती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ये दिक्कतें सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं हैं. बल्कि ये सभी उम्र के लोगों में देखी जाती हैं, जिनमें टीनएजर्स, बीस, तीस और चालीस साल की महिलाएं और मेनोपॉज से गुजर रही महिलाएं शामिल हैं.
खांसने पर पेशाब लीक होने के मुख्य कारण
किसी व्यक्ति के जीवन में कई कारणों से पेल्विक फ्लोर की मजबूती और बनावट पर असर पड़ सकता है. खांसने पर पेशाब लीक होने की समस्या अक्सर इन्हीं जरूरी सपोर्टिव स्ट्रक्चर के कमजोर होने से जुड़ी होती है.
बच्चे का जन्म : यह महिलाओं के लिए सबसे बड़े रिस्क फैक्टर्स में से एक है.
प्रेग्नेंसी: बढ़ते हुए गर्भाशय का वजन महीनों तक पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर लगातार दबाव डालता है.
वेजाइनल डिलीवरी: बच्चे के जन्म की प्रक्रिया पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों और उन्हें कंट्रोल करने वाली नसों को खींच सकती है और कभी-कभी डैमेज भी कर सकती है. डिलीवरी के दौरान फोर्सेप्स या वैक्यूम का इस्तेमाल इस रिस्क को बढ़ा सकता है.
मेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव: एस्ट्रोजन हार्मोन यूरेथ्रा की लाइनिंग की मोटाई और पेल्विक मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद जब एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है, तो ये टिश्यू कमजोर हो सकते हैं और दबाव झेलने की उनकी क्षमता कम हो जाती है, जिससे लीकेज की संभावना बढ़ जाती है.
पेल्विक फ्लोर पर लगातार दबाव : कोई भी ऐसी स्थिति जो बार-बार पेट पर दबाव डालती है, वह समय के साथ पेल्विक फ्लोर को कमजोर कर सकती है.
लगातार खांसी: क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा या लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों की खांसी जैसी स्थितियां बार-बार और जोरदार दबाव बनाती हैं.
लगातार कब्ज: मल त्यागने के लिए बार-बार ज़ोर लगाने से पेल्विक फ्लोर पर काफी दबाव पड़ता है.
मोटापा: शरीर का अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास, ब्लैडर और पेल्विक मांसपेशियों पर लगातार नीचे की ओर दबाव डालता है.
पहले हुई पेल्विक सर्जरी: कुछ सर्जिकल प्रक्रियाओं का असर यूरिनरी सिस्टम (मूत्र प्रणाली) के सपोर्ट देने वाले हिस्सों पर पड़ सकता है.
हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालना): गर्भाशय को हटाने से कभी-कभी ब्लैडर और यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) को मिलने वाले शारीरिक सपोर्ट पर असर पड़ सकता है.
पुरुषों में प्रोस्टेट सर्जरी: हालांकि SUI महिलाओं में ज्यादा आम है, लेकिन पुरुषों को भी यह हो सकता है, अक्सर प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी (प्रोस्टेटेक्टॉमी) की जटिलता के रूप में, जिससे यूरेथ्रल स्फिंक्टर (मूत्रमार्ग की मांसपेशी) को नुकसान पहुंच सकता है.
अगर आपको स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस है, तो इन स्थितियों में पेशाब लीक हो सकता है
खांसने या छींकने पर
हंसने पर
झुकने पर
कोई भारी चीज उठाने पर
एक्सरसाइज करने पर
सेक्स करने पर
हो सकता है कि इनमें से कोई भी काम करने पर हर बार पेशाब लीक न हो. लेकिन कोई भी ऐसी गतिविधि जिससे आपके ब्लैडर पर दबाव पड़ता है, उससे लीकेज की संभावना बढ़ सकती है। ब्लैडर भरा होने पर लीकेज की संभावना ज्यादा होती है.
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर आपके लक्षण आपको परेशान करते हैं या काम, शौक और सोशल लाइफ जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों में रुकावट डालते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें.

