हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास या मलमास) को आध्यात्मिक उन्नति और सोए हुए भाग्य को जगाने का सबसे पवित्र महीना माना गया है। भगवान विष्णु का प्रिय होने के कारण इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में किए गए दान, जप और तप का फल सामान्य दिनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है।
अब यह पावन महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। यदि आप पूरे महीने पूजा-पाठ या कोई विशेष अनुष्ठान नहीं कर पाए हैं, तो निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के आखिरी 4 दिन पूरे महीने के बराबर पुण्य फल देने वाले माने गए हैं।
यदि आप इन बचे हुए 4 दिनों में नीचे दिए गए कुछ बेहद सरल लेकिन अचूक कार्य कर लेते हैं, तो जीवन की हर रुकावट दूर होगी और सफलता आपके कदम चूमेगी।
आइए जानते हैं इन 4 दिनों के महा-उपाय।
- इन 4 दिनों का महत्व: क्यों हैं ये आखिरी दिन खास?
जैसे किसी परीक्षा के आखिरी दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही पुरुषोत्तम मास के अंतिम 4 दिन इस पूरे महीने की ऊर्जा का निचोड़ होते हैं। इस समय ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह चरम पर होता है। यदि इस अवधि में भगवान पुरुषोत्तम (श्रीहरि) की शरण ली जाए, तो कुंडली के बड़े से बड़े ग्रह दोष (जैसे शनि दोष, राहु-केतु दोष और पितृदोष) शांत हो जाते हैं।
- बचे हुए 4 दिनों में अवश्य करें ये 5 महा-कार्य
क) 33 मालपुओं का महादान (दरिद्रता नाशक उपाय)
पुरुषोत्तम मास में ’33’ की संख्या का बहुत महत्व है, क्योंकि यह 33 कोटि देवताओं का प्रतीक है।
क्या करें: इन अंतिम दिनों में किसी भी एक दिन कांसे के पात्र में 33 मालपुए रखकर किसी सुपात्र ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें।
लाभ: यदि आपके व्यापार में मंदी है या नौकरी में प्रमोशन रुका हुआ है, तो यह दान आपकी आर्थिक स्थिति में चमत्कारी बदलाव लाएगा।
ख) दीपदान की महा-परंपरा (भाग्य उदय के लिए)
शास्त्रों में अधिकमास के अंतिम दिनों में दीपदान को सर्वोत्तम माना गया है।
क्या करें: इन 4 दिनों में रोज शाम को घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे के पास, और पास के किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे गाय के घी का दीपक अवश्य जलाएं। संभव हो तो नदी या तालाब में भी दीप प्रवाहित करें।
लाभ: यह उपाय जातक के जीवन के अंधकार (मानसिक तनाव, कर्ज और असफलता) को मिटाकर सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
ग) ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का अखंड मानसिक जाप
इन बचे हुए दिनों में समय का पूरा सदुपयोग करें। उठते-बैठते, काम करते हुए भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का मानसिक जाप करते रहें।
लाभ: मंत्र की यह ध्वनि तरंगें आपके ओरा (Aura) को इतना मजबूत कर देंगी कि आपके बिगड़े हुए काम भी अचानक बनने लगेंगे।
घ) तुलसी दल और शंख से नारायण का अभिषेक
अधिकमास के अंतिम 4 दिनों में सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु या बालकृष्ण की मूर्ति का दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल या दूध भरकर अभिषेक करें। उन्हें पीले फूल और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य अर्पित करें।
ध्यान रखें: भगवान विष्णु को बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं होता, इसलिए तुलसी का प्रयोग अनिवार्य है। इससे माता लक्ष्मी स्वतः ही प्रसन्न हो जाती हैं।
ङ) गौ सेवा और असहायों की मदद
इन 4 दिनों में किसी गोशाला में जाकर गाय को हरा चारा, गुड़ या भीगी हुई चने की दाल खिलाएं। इसके अलावा, किसी असहाय या बीमार व्यक्ति की अपनी सामर्थ्य अनुसार मदद करें। शनि देव और गुरु देव दोनों ही इस कार्य से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
- सफलता के द्वार खोलने वाला विशेष ‘राशि अनुसार’ उपाय
अगर आप अपनी सफलता की गति को और तेज करना चाहते हैं, तो इन 4 दिनों में अपनी राशि के तत्व के अनुसार यह छोटा सा काम करें:
अग्नि तत्व (मेष, सिंह, धनु): भगवान विष्णु के सामने कपूर जलाकर आरती करें और केसर का तिलक लगाएं।
पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या, मकर): इन दिनों में किसी गरीब को अन्न (चावल या गेहूं) का दान करें।
वायु तत्व (मिथुन, तुला, कुंभ): भगवान विष्णु को पीले फल (केले या आम) अर्पित करें और विष्णु सहस्रनाम का श्रवण करें।
जल तत्व (कर्क, वृश्चिक, मीन): शंख में जल भरकर पूरे घर में छिड़कें ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो।
- क्या न करें इन अंतिम दिनों में?
जितना जरूरी यह जानना है कि क्या करें, उतना ही जरूरी है यह जानना कि क्या न करें:
घर में पूरी तरह शांति बनाए रखें, किसी से वाद-विवाद या क्लेश न करें।
इन 4 दिनों में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से पूरी तरह दूरी बना कर रखें।
किसी भी जीव, पशु या मनुष्य का अपमान न करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
पुरुषोत्तम मास ईश्वर की कृपा का एक ‘बोनस महीना’ है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। इसके बचे हुए 4 दिन आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकते हैं। आलस्य को छोड़िए और पूरे विश्वास के साथ इन उपायों को अपनाएं। जब ईश्वर की कृपा और आपका पुरुषार्थ एक साथ मिलेंगे, तो सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।

