मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर:- छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जिले में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों से घिर गई है. गरीब परिवारों की बेटियों के सम्मान और भरोसे से जुड़ी इस योजना में चांदी के नाम पर कथित तौर पर गिलट के मंगलसूत्र बांटे जाने का मामला जिला स्तरीय जांच में सही पाया गया है. इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं.
चांदी की जगह नकली मंगलसूत्र
10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडाँड़ महामाया मंदिर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था. शासन की ओर से नवविवाहिताओं को उपहार सामग्री के साथ चांदी के मंगलसूत्र भी वितरित किए गए. विवाह के कुछ समय बाद कई महिलाओं ने मंगलसूत्र की गुणवत्ता पर संदेह जताया और आरोप लगाया कि चांदी के नाम पर उन्हें गिलट के मंगलसूत्र थमा दिए गए.
जांच में अनियमितता की पुष्टि
मामले की शिकायत सामने आने के बाद एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़ेने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की. समिति ने दस्तावेजों और वितरित सामग्री की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में शिकायत को सही माना और अनियमितता की पुष्टि की. जांच रिपोर्ट के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए विभाग के संचालक को पत्र भी भेजा गया.
जिला कार्यक्रम अधिकारी का जवाब
हालांकि मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब विभाग के संचालक स्तर से प्रारंभिक तौर पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार कर दिया गया. इससे जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट और विभागीय रुख के बीच विरोधाभास खुलकर सामने आ गया. अब जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा का कहना है कि उन्हें संचालक कार्यालय से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने प्रस्तुत कर दिया है.
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. सवाल यह भी है कि जब जिला जांच में अनियमितता प्रमाणित हो चुकी है, तो आखिर दोषियों पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? गरीब बेटियों के नाम पर संचालित योजना में यदि वास्तव में गड़बड़ी हुई है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होना भी उतना ही जरूरी है.

