रायपुर:- छत्तीसगढ़ में खनिजों का भंडार है. अभी हाल में बलौदा बेलमुंडी में हीरा मिला था. इसे देखते हुए देश के खनिज विभाग ने बलौदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में ड्रिलिंग को मंजूरी दी है. एनएमडीसी सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसमें अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया है. यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आंकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है.
बलौदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक को लेकर फैसला
बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की है. इसके साथ निदेशक मंडल ने निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं. बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा. इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा. एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी और आशीष चटर्जी मौजूद रहे. उनके अलावा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल भी इस मीटिंग का हिस्सा रहे.
बलौदा बेलमुंडी के हीरे की हुई पहचान
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार का उपक्रम है. इसमें एनएमडीसी लिमिटेड की हिस्सेदारी 51 फीसदी और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट की हिस्सेदारी 49 फीसदी है. इस तरह दोनों मिलकर यहां काम करेगी. कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
बेशकीमती हीरे की हुई पहचान
एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई. इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए. इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है.

