रायपुर :- अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और इंश्योरेंस पॉलिसियों में लाखों रुपये का निवेश करना एक बेहतरीन फैसला है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अचानक आपके साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो आपके पीछे परिवार को इस संचित धन का पता कैसे चलेगा?
आज के डिजिटल युग में सही जानकारी और पुख्ता रिकॉर्ड न होने के कारण हर साल देश के हजारों परिवारों को उनके अपनों की मेहनत की कमाई का अधिकार नहीं मिल पाता. जानकारी के अभाव में करोड़ों रुपये की ऐसी लावारिस संपत्ति सरकारी खातों में जमा हो रही है, जिसका कोई वारिस ही सामने नहीं आता.
डिजिटल क्रांति के बीच बिखरी हुई जमा पूंजी
पहले के समय में घर के बड़े-बुजुर्ग अपनी एफडी की रसीदें, शेयर सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस के कागजात अलमारी या लोहे के सुरक्षित लॉकरों में संभाल कर रखते थे. ऐसे में परिवार के लिए उन्हें ढूंढना और क्लेम करना बेहद आसान होता था. लेकिन आज के इस डिजिटल दौर में निवेश का पूरा ढांचा ही बदल चुका है.
आज लोगों का पैसा किसी एक भौतिक दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि अलग-अलग मोबाइल ऐप्स (जैसे Zerodha, Groww, Upstox), डीमैट खातों, कई बैंक अकाउंट्स और ईमेल्स के भीतर सिमट कर रह गया है. अगर परिवार को सही ऐप, रजिस्टर्ड ईमेल या पासवर्ड की जानकारी न हो, तो आपकी आंखों के सामने मौजूद लाखों-करोड़ों का निवेश भी आपके बाद छिपा रह जाता है. किसी भी अनहोनी की स्थिति में दुखी परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्लेम फाइल करने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की होती है कि पैसा आखिर रखा कहां है.
मास्टर एक्सेल शीट: बिखरे पैसे का सुरक्षित नक्शा
इस बड़ी परेशानी से बचने के लिए हर निवेशक को आज ही अपने सभी वित्तीय रिकॉर्ड की एक ‘मास्टर एक्सेल शीट’ या एक ‘वित्तीय डायरी’ तैयार करनी चाहिए. इस डिजिटल लिस्ट में आपकी हर छोटी-बड़ी संपत्ति का पूरा विवरण होना चाहिए.
इस मास्टर लिस्ट में क्या-क्या होना जरूरी है?
बैंक खातों का विवरण: सभी बैंकों के नाम, खाता संख्या और आईएफएससी कोड.
डीमैट और ब्रोकर ऐप्स: आप निवेश के लिए जिन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं उनके नाम और क्लाइंट आईडी.
म्यूचुअल फंड: म्यूचुअल फंड कंपनियों (AMC) के नाम और उनके फोलियो नंबर.
बीमा पॉलिसियां: लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के नाम, पॉलिसी नंबर और सम एश्योर्ड (बीमा राशि).
सरकारी बचत: पीएफ का यूएएन नंबर, पीपीएफ खाता संख्या और सभी एफडी की जानकारी.
इस लिस्ट को बनाने के बाद इसे लगातार अपडेट करते रहें और इसकी जानकारी अपने जीवनसाथी या किसी बेहद भरोसेमंद पारिवारिक सदस्य को जरूर दें. 31 मार्च, 2027 से पहले अपने सभी खातों में नॉमिनेशन की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा कर लें.
बड़ा भ्रम: सिर्फ नॉमिनी बनाना ही काफी नहीं, ‘वसीयत’ है जरूरी
ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि अगर उन्होंने बैंक या म्यूचुअल फंड में अपनी पत्नी या बच्चों को ‘नॉमिनी’ बना दिया है, तो उनके बाद पूरा पैसा सीधे उनका हो जाएगा. लेकिन कानून की नजर में ऐसा नहीं है.
देश के बैंकिंग और वित्तीय नियमों के अनुसार, नॉमिनी केवल संपत्ति का रखवाला होता है, असली मालिक नहीं. व्यक्ति की मृत्यु के बाद नॉमिनी का काम सिर्फ बैंक से पैसा लेना और उसे कानूनी वारिसों तक पहुंचाना होता है. यदि भविष्य में परिवार के भीतर कोई विवाद होता है, तो कानूनी वारिस उस पैसे पर अपना दावा ठोक सकते हैं.
इस कानूनी विवाद से बचने का एकमात्र अचूक रास्ता है—एक ठोस और रजिस्टर्ड वसीयत. वसीयत में यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि आपके बाद किस संपत्ति का असली मालिक कौन होगा. सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि आप अपनी वसीयत में जिस व्यक्ति को जो संपत्ति दे रहे हैं, उसे ही उस बैंक या निवेश खाते का नॉमिनी भी बनाएं. 18 वर्ष से ऊपर का कोई भी व्यक्ति अपनी वसीयत खुद लिख सकता है.
‘डे-वन’ यानी पहले ही दिन परिवार को क्या पता होना चाहिए
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 10 से 15 अलग-अलग जगहों पर कुल ₹1 करोड़ का निवेश किया है. अचानक संकट आने पर परिवार को तुरंत क्लेम के लिए नहीं भागना चाहिए, बल्कि सबसे पहले उन निवेशों को सुरक्षित करना चाहिए. इसके लिए परिवार के पास इन तीन बुनियादी जानकारियों का होना बेहद जरूरी है:
आपका पैन कार्ड और आधार नंबर.
आपका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ताकि निवेश से जुड़े ओटीपी (OTP) प्राप्त किए जा सकें.
आपकी प्राइमरी ईमेल आईडी और उसका पासवर्ड, जिससे बैंक स्टेटमेंट और ब्रोकर मेल चेक किए जा सकें.
विभिन्न संपत्तियों (जैसे शेयर, एफडी, बीमा) के क्लेम की कागजी कार्रवाई लंबी होती है और इनके नियम अलग-अलग होते हैं, जिन्हें बाद में भी आराम से पूरा किया जा सकता है.
अगर निवेश का कभी पता ही न चले, तो क्या होता है
अगर परिवार को यह कभी पता ही न चले कि दिवंगत व्यक्ति का किसी ऐप पर डीमैट खाता था, तो वे शेयर या म्यूचुअल फंड अचानक गायब नहीं होते. वे उसी खाते में रहते हैं. लेकिन, नियमों के मुताबिक अगर लंबे समय तक उस खाते में कोई हलचल नहीं होती, तो उस लावारिस संपत्ति को सरकार के इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड या सरकारी सिस्टम में ट्रांसफर कर दिया जाता है. एक बार पैसा आईईपीएफ (IEPF) में चला जाए, तो उसे वापस निकालना एक बेहद जटिल, लंबी और थका देने वाली कानूनी प्रक्रिया बन जाती है.
आपकी मेहनत की कमाई आपके परिवार के बुरे समय में काम आ सके, यह सुनिश्चित करना आपकी ही जिम्मेदारी है. इसलिए आज ही समय निकालें, अपनी मास्टर एक्सेल शीट तैयार करें, नॉमिनेशन फॉर्म भरें और वसीयत की प्रक्रिया को 31 मार्च, 2027 की समयसीमा से पहले सुरक्षित रूप से पूरा करें.

