बिलासपुर:- सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का हरदी कला टोना इलाका एक ही रात दो गंभीर वारदातों से दहल उठा. पहली घटना में मामूली विवाद में छोटे भाई ने अपने ही सगे बड़े भाई की जान ले ली. वहीं दूसरी घटना में शराब दुकान के बाहर युवकों के बीच हुआ विवाद चाकूबाजी में बदल गया, जिसमें एक युवक पर प्राणघातक हमला किया गया. दोनों घटनाओं के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए.
रक्षाबंधन के दिन भाई ने भाई की हत्या
हरदी गांव के सूर्यवंशी मोहल्ले की घटना है, जहां सुभाष कुरै, उम्र 38 वर्ष की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि राखी बांधने के लिए सुभाष की बहन व उसका भांजा घर आए थे. इसी दौरान सुभाष के छोटे भाई सुदर्शन कुरै ने अपने भांजे से विवाद करते हुए कथित तौर पर मारपीट शुरू कर दी. भांजे से मारपीट करते देख सुभाष बीच-बचाव करने पहुंचा. इसी दौरान दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया. तैश में आए सुदर्शन ने सब्बल से अपने ही भाई सुभाष पर वार कर दिया. हमला इतना गंभीर था कि सुभाष ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. वारदात के बाद आरोपी सुदर्शन फरार हो गया. सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची. जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालते हुए आरोपी की तलाश में जुटी है.
शराब दुकान के बाहर खूनी खेल, युवक पर चाकू से प्राणघातक हमला
इसी क्षेत्र में दूसरी वारदात ग्राम हरदी कला-टोना स्थित शराब दुकान के सामने हुई. बताया जा रहा है कि हरदी निवासी राकेश प्रजापति का शराब लेने की बात को लेकर कुछ युवकों से विवाद हो गया. देखते ही देखते कहासुनी मारपीट और फिर चाकूबाजी में बदल गई. आरोप है कि कुछ युवकों ने मिलकर राकेश पर चाकू से हमला कर दिया. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और युवक खून से लथपथ सड़क पर अचेत पड़ा रहा. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए. सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की.
कैमरे सिर्फ दुकान के अंदर, बाहर अंधेरा, जांच में पुलिस के सामने चुनौती
इस वारदात ने शराब दुकान की सीसीटीवी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. बताया जा रहा है कि दुकान के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन मुख्य मार्ग और दुकान के बाहर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त कैमरे नहीं हैं. खास बात यह है कि शराब दुकान मुख्य मार्ग के साथ रहवासी इलाके में स्थित है. ऐसे में बाहर होने वाली मारपीट, विवाद और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए कैमरों का अभाव गंभीर सवाल पैदा करता है. चाकूबाजी के बाद आरोपियों की पहचान में भी पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही है.

