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    CG: छठी के छात्र की मौत:सांप काटने के बाद अस्पताल ले जाने के बजाय मंदिर पहुंचा परिवार, डॉक्टर बोले- समय पर इलाज मिलता तो बच सकता था बच्चा

    DabangBy DabangMay 24, 2026No Comments3 Mins Read
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    बालोद:- जिले के डौंडी थाना क्षेत्र से अंधविश्वास और लापरवाही की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। सांप काटने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से 11 साल के एक मासूम की मौत हो गई। परिजन बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक कराने मंदिर ले गए, जहां घंटों तक तंत्र-मंत्र चलता रहा। जब बच्चे की हालत बिगड़ गई, तब उसे जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।घटना डौंडी थाना क्षेत्र के ग्राम छिन्दगांव की है। मृतक की पहचान 11 वर्षीय गीतेश ढीमर के रूप में हुई है, जो गांव के स्कूल में छठवीं कक्षा का छात्र था।

    घर की बाड़ी में ब्रश करते समय सांप ने डसा

    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे गीतेश अपने घर की बाड़ी में ब्रश कर रहा था। इसी दौरान वहां रखे एक ड्रम के नीचे छिपे जहरीले सांप ने उसे डस लिया। सांप के काटते ही बच्चा घबराकर चिल्लाते हुए घर के अंदर भागा और परिजनों को पूरी बात बताई।परिजनों को तुरंत बच्चे को अस्पताल ले जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इलाज के बजाय झाड़फूंक का रास्ता चुना। बताया जा रहा है कि परिवार निजी वाहन से बच्चे को करीब 50 किलोमीटर दूर बालोद ब्लॉक के एक गांव स्थित मंदिर ले गया, जहां झाड़फूंक की जाती है।

    घंटों चलता रहा झाड़फूंक का सिलसिला

    मंदिर में कई घंटे तक झाड़फूंक और पूजा-पाठ चलता रहा। इस दौरान बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। दोपहर करीब 12 बजे जब उसकी स्थिति गंभीर हो गई और हालत हाथ से निकलती नजर आने लगी, तब परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल बालोद पहुंचे।अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि शरीर में जहर पूरी तरह फैल चुका था।

    “समय पर अस्पताल लाते तो बच सकती थी जान”

    बालोद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सांप काटने के मामलों में सबसे जरूरी होता है मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना, जहां एंटीवेनम इंजेक्शन देकर जान बचाई जा सकती है।अधिकारियों के मुताबिक बच्चे के घर से डौंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दूरी महज 2 किलोमीटर थी, लेकिन परिजन उसे वहां ले जाने के बजाय झाड़फूंक कराने दूर मंदिर पहुंच गए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि वे बालोद जिला अस्पताल के सामने से भी गुजरे, लेकिन बच्चे को वहां भर्ती नहीं कराया।इसी देरी के कारण जहर पूरे शरीर में फैल गया और मासूम की मौत हो गई।

    बेहद गरीब परिवार का इकलौता बेटा था गीतेश

    गांव के उपसरपंच पवन साहू ने बताया कि गीतेश बेहद गरीब परिवार से था। उसके पिता कन्हैयालाल ढीमर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में गीतेश की एक बड़ी बहन है और वह घर का इकलौता बेटा था।उन्होंने बताया कि घर में शौचालय निर्माण का काम चल रहा था, जिसके लिए गड्ढा खोदा गया था। पास में पानी की टंकी और निर्माण सामग्री रखी थी। संभवतः उसी जगह जहरीला सांप छिपा हुआ था और बच्चा उसकी चपेट में आ गया।

    अंधविश्वास पर फिर उठे सवाल

    इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। साथ ही अंधविश्वास और झाड़फूंक जैसी प्रथाओं को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करता रहा है कि सांप काटने पर तत्काल अस्पताल जाएं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग झाड़फूंक और तंत्र-मंत्र पर भरोसा करते हैं।

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