कांकेर:- प्राकृतिक खूबसूरती के लिए देश-दुनिया में मशहूर बस्तर संभाग में हरी-भरी वादियों और कलकल बहते जलप्रपातों की कोई कमी नहीं है. इसकी शुरुआत बस्तर के प्रवेश द्वार उत्तर बस्तर कांकेर जिले से ही शुरू हो जाती है. ऐसा ही एक पर्यटन स्थल है कांकेर का मलाजकुडूम… बारिश के दिनों में कांकेर का सुप्रसिद्ध ‘मलाजकुडूम जलप्रपात’ शबाब पर है. ऊंचाइयों से गिरता कभी दूधिया तो कभी मटमैला पानी और चारों ओर फैली घनी हरियाली सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर रही है.
3 चरणों में गिरता है पानी
मलाजकुडूम जलप्रपात जिला मुख्यालय कांकेर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह जलप्रपात तीन अलग-अलग चरणों में गिरता है, जिसके चलते यहां का नजारा बेहद मनोरम दिखाई देता है. बारिश के दिनों में जब पहाड़ों और जंगलों के बीच से पानी तेज धार के साथ नीचे गिरता है, तो पूरा इलाका किसी प्राकृतिक चित्र की तरह नजर आता है.
मलाजकुडूम जलप्रपात तीन झरनों से मिलकर बना है. इसके अलग-अलग चरणों की ऊंचाई करीब 10 मीटर, 15 मीटर और 9 मीटर बताई जाती है. वहीं स्थानीय स्तर पर इसके तीन चरणों को करीब 60 से 65 फीट, 40 से 45 फीट और 20 से 25 फीट की ऊंचाई से गिरने वाले जलप्रपात के रूप में बताया जाता है. यह जलप्रपात दूध नदी क्षेत्र में स्थित है.
बारिश में बढ़ जाती है खूबसूरती
मानसून के दौरान मलाजकुडूम का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है. कांकेर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों और दूसरे राज्यों से भी लोग बारिश के मौसम में यहां घूमने पहुंचते हैं. प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर मलाजकुडूम जलप्रपात कांकेर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है.
ग्रामीण समिति ने संभाली व्यवस्था की जिम्मेदारी
मलाजकुडूम को पर्यटन की दृष्टि से और बेहतर बनाने के लिए अब स्थानीय ग्राम समिति ने भी पहल शुरू की है. समिति की ओर से जलप्रपात क्षेत्र की साफ-सफाई, देखरेख और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है. ग्रामीणों की इस पहल से पर्यटन स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने में मदद मिल रही है.

