रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नंदनवन जू एवं जंगल सफारी से एक दुखद खबर सामने आई है. यहां की 25 वर्षीय मादा हिमालयन भालू ‘फफोरी’ अब इस दुनिया में नहीं रही. 19 अक्टूबर 2026 की रात वृद्धावस्था के कारण फफोरी ने अंतिम सांस ली. साल 2012 में असम के गुवाहाटी से नंदनवन लाई गई फफोरी ने अपने जीवन के कई साल जंगल सफारी में बिताए. उसके निधन से जंगल सफारी प्रबंधन और उसकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों में शोक का माहौल है. नियमानुसार पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसे श्रद्धांजलि अर्पित कर विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.
गुवाहाटी से रायपुर तक का सफर, 14 साल से नंदनवन में रह रही थी फफोरी
नंदनवन जू एवं जंगल सफारी प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, मादा हिमालयन भालू फफोरी को साल 2012 में वन्यप्राणी आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत असम के गुवाहाटी स्थित चिड़ियाघर से रायपुर लाया गया था. उस समय उसकी उम्र 12 वर्ष थी. इसके बाद से वह नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में रह रही थी.गुवाहाटी से रायपुर तक का सफर तय करने वाली फफोरी ने अपने जीवन के करीब 14 वर्ष नंदनवन में बिताए. 25 वर्ष की उम्र में उसके निधन से उसकी देखभाल में जुटे कर्मचारियों को गहरा दुख पहुंचा है.
उम्र के कारण हुई मौत
जंगल सफारी प्रबंधन के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि में फफोरी की मृत्यु हो गई. उसकी मौत का कारण बढ़ती उम्र यानी वृद्धावस्था है.लंबे समय तक नंदनवन में रहने वाली फफोरी के निधन के बाद प्रबंधन ने नियमानुसार आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं.वन्यप्राणी चिकित्साधिकारी ने उसका पोस्टमार्टम किया, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत मृत्यु के बाद की चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी की जा सकें.
पोस्टमार्टम के बाद दी गई अंतिम विदाई
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फफोरी का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.इस दौरान नंदनवन जू एवं जंगल सफारी प्रबंधन के अधिकारी, वन विभाग के कर्मचारी, पशुपालक और सुरक्षा कर्मचारी मौजूद रहे. सभी ने फफोरी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उसे अंतिम विदाई दी. जिस वन्यजीव की देखभाल में कर्मचारी लंबे समय से जुटे हुए थे, उसके निधन ने सफारी परिसर में भावुक माहौल पैदा कर दिया.इस अवसर पर नंदनवन जू एवं जंगल सफारी के संचालक सह-वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत, सहायक संचालक सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे.

