कोरबा:- कोरबा में गैंगरेप के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। लेमरू थाना क्षेत्र के इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि ट्रायल के दौरान जब पीड़िता अपने बयान से मुकर गई, तब DNA रिपोर्ट समेत वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी।
गहरा घुसकर जबरन किया रेप
अभियोजन के मुताबिक, घटना रात के वक्त की है। आरोप है कि हस्रुहन मंझवार और अजय सिंह पीड़िता के घर में जबरन दाखिल हुए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकी दी और वहां से फरार हो गए। मामले की शिकायत के बाद लेमरू पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। मामला अदालत पहुंचा तो अभियोजन के सामने उस वक्त बड़ी चुनौती खड़ी हो गई, जब पीड़िता ने ट्रायल के दौरान अपने पहले के बयान से पलटते हुए घटना से इनकार कर दिया। लेकिन जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य अभियोजन के पास मौजूद थे।
DNA बना अहम सबूत
फोरेंसिक जांच की DNA रिपोर्ट को मामले का अहम साक्ष्य बताया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, DNA रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने पीड़िता को दोबारा बयान के लिए बुलाया। इसके बाद पीड़िता ने बताया कि आरोपियों की धमकी और डर के कारण उसने पहले अदालत में घटना से इनकार किया था। दोबारा बयान में उसने घटना के संबंध में जानकारी दी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने DNA रिपोर्ट समेत उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों को रखा। अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने अभियोजन की ओर से मामले में पैरवी की।
दोनों आरोपियों को कठोर कारावास की सजा
पूरे मामले की सुनवाई के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा ने दोनों आरोपियों को दोषी माना और हस्रुहन मंझवार तथा अजय सिंह को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यानी इस मामले में ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान में बदलाव के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य जांच और अभियोजन के लिए अहम साबित हुए। अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को अब लंबी अवधि की सजा भुगतनी होगी। कोरबा के लेमरू क्षेत्र से सामने आए इस मामले में कोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुनवाई के दौरान सामने आए अलग-अलग बयानों के बीच DNA जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अभियोजन ने मामले की कड़ी के तौर पर अदालत के सामने रखा और इसी आधार पर दोषसिद्धि हुई।

