बालोद:- प्रशासन का उपक्रम और बालोद जिले का प्रतिष्ठित दूध गंगा पर कलेक्टर ने आकस्मिक निरीक्षण किया. इस दौरान इस मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट में लापरवाही और गंदगी का अंबार मिला. इसके बाद से कलेक्टर ने उसके मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है. आपको बता दें कि प्रशासनिक टीम शुक्रवार को बालोद शहर का जायजा लेने पहुंची थी. जहां दूध गंगा में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गंदगी या देखी इसके बाद यह निर्णय लिया गया.
प्रोसेसिंग यूनिट सील, सैंपल भी लिया गया
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान चीजें अस्त व्यस्त थी, मक्खियां भी घूम रही थी इसके लिए जुर्माने के साथ जांच के निर्देश दिए हैं. तब तक के लिए प्रोसेसिंग यूनिट को बंद करने निर्देशित किया गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि दूध के सैंपल लेकर लैब टेस्ट भेजने के भी निर्देश दिए हैं.
सुरक्षा-स्वच्छता मानकों को किया नजरअंदाज
आपको बता दें यह यूनिट प्रशासन का एक उपक्रम है. निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में कमियां पाई गईं. मिठाई निर्माण इकाई और तैयार सामग्रियों में शुद्धता और साफ-सफाई की कमी मिली. फ्लोर बेस के गड्ढों में जमे पानी से दुर्गंध आ रही थी. वहीं निर्माण कार्य में लगे हलवाइयों द्वारा कैप और ग्लब्स जैसे आवश्यक सुरक्षा संसाधनों का उपयोग भी नहीं किया जा रहा था.
नालियों में कीड़े, सफाई का अभाव
दूध गंगा फैक्ट्री की बदहाल स्थिति देखकर कलेक्टर नाराज हो गईं. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नाली का गंदा पानी सीधे परिसर में फैल रहा था. जहां मिठाइयां तैयार कर रखी गई थीं, वहां भी साफ-सफाई का अभाव था. दुकान के सामने नालियों में कीड़े बजबजाते नजर आए, जिसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कलेक्टर ने तत्काल फैक्ट्री सील करने के निर्देश दिए.
15 दिन का समय
हालांकि किसानों से दूध का क्रय एवं विक्रय
निरंतर जारी रहेगा ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो. चिलिंग और स्टोरेज यूनिट को खुला रखा गया है ताकि आम उपभोक्ताओं को दूध की आपूर्ति में कोई असुविधा न हो. संस्था को उपरोक्त कमियों को सुधारने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है. इन कमियों की पूर्ति और प्रशासन द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद, यदि सभी मानक सही पाए जाते हैं, तभी इकाई को फिर से संचालित करने की अनुमति प्रदान की जाएगी.
