सक्ती:- कल वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया. हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है. मृतक और घायलों के परिजन लगातार प्लांट प्रबंधन के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं. हादसे के बाद वेदांता पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से मुआवजे का ऐलान किया गया है. मृतक के परिजनों को 35 लाख का मुआवजा दिया जाएगा. हादसे में जो मजदूर घायल हुए हैं उनको 15 लाख का मुआवजा मिलेगा. वेदांता पावर प्लांट की ओर से कहा गया है कि घायल मजदूरों के इलाज का खर्च प्लांट प्रबंधन उठाएगा. प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया है कि वो हरेक परिवार से 1 सदस्य को नौकरी भी देगा.
हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 14
सक्ती कलेक्टर ने कहा कि हादसे के बाद से लगातार जिला प्रशासन की टीम हालात पर नजर बनाए हुए है. कलेक्टर ने कहा कि 19 घायल मजदूरों का इलाज अस्पताल में जारी है. घायलों को बेहतर इलाज मिले इसके लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं. कलेक्टर ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा भी मृतक और घायलों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी. मृतक के परिजनों को शासन की ओर से 5 लाख और घायलों को 50 हजार की आर्थिक मदद दी जाएगी.
हादसे पर पीएम मोदी ने जताया दुख
पीएम मोदी सक्ती में हुए हादसे पर दुख जताया है. पीएम ने अपने शोक संदेश में कहा कि ये घटना बहुत दुखद है. लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके प्रति हमारी पूरी संवेदना है. पीएम ने कहा कि घायलों को उचित इलाज मिले इसकी पूरी व्यवस्था स्थानीय शासन की ओर से की जा रही है.
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर कांग्रेस ने एक जांच समिति का गठन किया है. जांच समिति पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी. इस टीम में कुल लोगों के नाम शामिल हैं. टीम के सदस्य पीड़ित परिवार से मिलकर घटना की जानकारी हासिल करेंगे. जांच समिति में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा, विधायक रामकुमार यादव, विधायक अटल श्रीवास्तव, विधायक बालेश्वर साहू, विधायक राघवेंद्र सिंह, विधायक व्यास कश्यप, विधायक शेषराज हरवंश, जिला अध्यक्ष रश्मि गवेल, जिला अध्यक्ष राजेश अग्रवाल का नाम शामिल है.
जानिए क्या होता है पावर प्लांट का बॉयलर और कैसे करता है ये काम
पावर प्लांट का बॉयलर एक बंद उपकरण होता है जो मुख्य रूप से ईंधन जलाने से निकलने वाली गर्मी का इस्तेमाल करके पानी को भाप में बदलता है. इस भाप का इस्तेमाल फिर टर्बाइन चलाने के लिए किया जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है. बॉयलर का टेप्रेचर काफी ज्यादा होता है.

