कोरबा:- एनटीपीसी के कोरबा में स्थापित 2600 मेगावाट प्लांट में शुक्रवार शाम एक बड़ा औद्योगिक संकट पैदा हो गया. तकनीकी खराबी के कारण प्लांट के सभी सात यूनिट एक साथ ट्रिप यानी बंद हो गई. जिसका असर इस प्लांट के सात लाभार्थी राज्यों पर पड़ा है.
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के बे (Bay) ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान आए इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के कारण यह तकनीकी खामी उत्पन्न हुई है. इसकी सूचना मिलते ही कोरबा से दिल्ली तक पावर सेक्टर में हड़कंप मच गया. समूह महाप्रबंधक किशोर चंद्र महापात्र सहित बिजली उत्पादन से सीधे तौर पर जुड़े कंपनी के शीर्ष अधिकारी व इंजीनियर स्विच यार्ड पहुंचे. प्लांट को रिस्टोर करने का प्रयास शुरू किया गया.
प्रबंधन का दावा है कि देर रात तक सभी इकाइयों को रिस्टोर कर लिया गया है. हालांकि कुछ तकनीकी खामियों को सुधारने का काम अब भी जारी है. इस खराबी के कारण देश के महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, गोवा के साथ 7 राज्यों में बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है. एनटीपीसी कोरबा के पावर प्लांट में 200 मेगावाट की 3 और 500 मेगावाट की 4 यूनिट हैं. जिनसे 2600 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है.
ब्लैकआउट की घटना बेहद दुर्लभ, कंपनी में हड़कंप
एनटीपीसी लिमिटेड के छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित 2,600 मेगावाट क्षमता के कोरबा सुपर थर्मल पावर प्लांट में हाल में घटी तकनीकी दुर्घटना बेहद दुर्लभ है. पूरे प्लांट की सभी यूनिट का एक साथ बंद हो जाना बहुत कम अवसरों पर होता है.
अब तक की जानकारी के अनुसार पावर प्लांट के भीतर लगे स्विचयार्ड में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान एक बड़ा इलेक्ट्रिकल फॉल्ट उत्पन्न हुआ. जिसके कारण संयंत्र की सभी 7 यूनिट एक साथ ट्रिप हो गईं. एक समय पर संपूर्ण प्लांट का विद्युत उत्पादन शून्य हो गया और प्लांट परिसर में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई. रूटीन और तकनीकी तौर पर इस तरह की टेस्टिंग पावर प्लांट में की जाती है.
बड़े नुकसान से बचने के लिए ब्रेकर बंद कर देता है प्लांट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्विच यार्ड में ब्रेकर की टेस्टिंग की जा रही थी. इसी दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट उत्पन्न हुआ. फाल्ट के सामने आते ही प्लांट का प्रोटेक्शन सिस्टम सक्रिय हो गया जिससे ब्रेकर ट्रिप हुआ. इसके प्रभाव से पावर प्लांट की सभी यूनिट ग्रिड से अलग हुई, सभी सातों यूनिट ट्रिप होने से पावर प्लांट में ब्लैक आउट की स्थिति बन गई.
पावर प्लांट से जिस बिजली का उत्पादन होता है, उसे ग्रिड तक पहुंचाने में स्विच यार्ड की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहती है. स्विच यार्ड में लगे सर्किट ब्रेकर बिजली प्रवाह की स्थिति को सामान्य बनाए रखते हैं, लेकिन जैसे ही कोई बड़ा फॉल्ट आता है. तब प्लांट का एक तरह से सुरक्षा कवच सक्रिय हो जाता है और बड़े नुकसान के बचाने के लिए ब्रेकर बिजली की सप्लाई को बंद देता है. जिससे सभी यूनिट ट्रिप हो जाते हैं, यह ग्रिड से भी डिसकनेक्ट हो जाते हैं. शुक्रवार के शाम को भी कुछ ऐसा ही हुआ. हालांकि ऐसा बेहद कम होता है. जब पूरे प्लांट में ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित हो जाए. कहीं ना कहीं यह एनटीपीसी प्रबंधन की पूरी कार्यशैली को सवालों में जरूर खड़ा करती है.
सात राज्यों तक बिजली आपूर्ति का प्रभाव
एनटीपीसी कोरबा एक इंटर-स्टेट पावर जनरेटर है, जो उत्पादित बिजली को क्षेत्रीय ग्रिड के माध्यम से कई राज्यों को आपूर्ति करता है. शुक्रवार की शाम को हुए आकस्मिक शटडाउन के कारण छत्तीसगढ़ समेत आसपास के लगभग 7 लाभार्थी राज्यों की विद्युत आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है. चुंकि प्लांट राज्य के भीतर है, जिसके कारण, स्टेट कोटे के साथ यहां की कुल मांग का बड़ा हिस्सा लगभग 30% छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को मिलता है. इसके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा सहित दादरा और नगर हवेली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस प्लांट से कोटा प्राप्त होता है. जहां बिजली की आपूर्ति की जाती है अचानक आए इस ब्लैक आउट की स्थिति से सभी राज्यों में असर पड़ा है.
करोड़ों के नुकसान की है संभावना
पावर प्लांट में इस तरह के संपूर्ण शटडाउन से होने वाले वित्तीय और उत्पादन नुकसान का आंकलन विद्युत नियामक आयोग (CERC/SERC) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के तय मानकों के तहत किया जाता है. जानकारों के अनुमान के मुताबिक करोड़ के नुकसान की संभावना है. हालांकि परिस्थितियों के पूरी तरह से सामान्य हो जाने के बाद नुकसान की गणना की जाती है. इसमें तकनीकी खराबी, उपकरण, उत्पादन हानि, ठप रही अवधि (घंटों में), प्लांट का लोड फैक्टर/क्षमता (2600 MW), जिससे यूनिट-वार मेगावाट की क्षति तय होती है. इन सभी बिंदुओं के आधार पर नुकसान का कुल आंकड़ा निर्धारित किया जाता है.
लाभार्थी राज्यों को बिजली नहीं मिलने पर ऊंचे दाम पर खरीदी
बिजली आपूर्ति बाधित होने पर एनटीपीसी कोरबा प्लांट से बिजली की आपूर्ति अचानक बंद हो जाती है. जिसके कारण लाभार्थी राज्यों को ग्रिड संतुलन बनाए रखने के लिए अपने क्षेत्रों में तत्काल बिजली कटौती करनी पड़ती है. जिससे घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को परेशानी होती है. डिस्कॉम (वितरण कंपनियों) को अपने उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने के लिए शॉर्ट-टर्म मार्केट या पावर एक्सचेंज से बहुत ऊंचे दामों पर बिजली खरीदनी पड़ती है, जिससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ता है.

