छिंदवाड़ा:- गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, गर्मी से बचने लोग घरों में एसी-कूलर सहित ठंडा खाने-पीने का सहारा लेते हैं. तपती गर्मी में हर कोई अपना गला तर करने की इच्छा रखता है, जिसके लिए कोई जूस, कोई कोल्ड्रिंक तो कोई आइस्क्रीम की दुकान पर पहुंचता है. चौक-चौराहों और बाजारों में आइसक्रीम की दुकानें सजी नजर आती है. गर्मी से राहत पाने के लिए अगर आप भी आइसक्रीम खाते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि कुछ कंपनियों की आइसक्रीम सबस्टैंडर्ड की पाई गई है.
दो कंपनियों की आइसक्रीम मिली नकली
खाद्य सुरक्षा अधिकारी गोपेश मिश्रा ने बताया कि “प्रदेश में मिलावट से मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है. गर्मी में आइसक्रीम व कोल्डड्रिंक की अत्यधिक खपत होती है. खास तौर पर बच्चे आइसक्रीम का अधिकतम उपयोग करते है. ऐसे मे आमजन को बिना मिलावट के आइसक्रीम उपलब्ध हो, इस बात की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा शहर के प्रमुख व छोटे-बड़े सभी आइसक्रीम विक्रेताओं से आइसक्रीम के नमूने इकट्ठे कर जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं.
इसी के उद्देश्य से कई नामी ब्रांड्स की आइसक्रीम के नमूने लिए गए थे. जिन्हें टेस्ट टे लिए लैब भेजा गया था. राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार एक नामी ब्रांड की आइसक्री के 3 फ्लेवर जिसमें मैंगो, बटर स्कॉच, वनीला और एक दूसरे ब्रांड की अल्फोंसों मैंगों फ्लेवर आइसक्रीम अमानक पायी गयी है.
डिस्ट्रीब्यूटर्स और कंपनी को दिए गए नोटिस, होगी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिश्रा ने बताया कि मामले में रिपोर्ट्स आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा दोनों ही डिस्ट्रीब्यूटर और इन आइसक्रीम बनाने वाली कंपनी को खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम 2006 की धारा 46(4) के तहत नोटिस दिए गए हैं. इसके अनुसार डिस्ट्रीब्यूटर और निर्माणकर्ता फर्म को विभाग में उपलब्ध नमूने के दूसरे भागों को केंद्रीय खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजकर जांच कराने का अधिकार होता है. खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार नोटिस अवधि के बाद जांच के अनुसार दोषियों पर नियमानुसार चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा.

