कई साइंटिफिक स्टडीज से पता चला है कि मोटापा और कैंसर एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं. ज्यादा वजन के कारण कई तरह के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. यह कनेक्शन खास तौर पर उन कैंसर के मामले में ज्यादा होता है जो आमतौर पर मेनोपॉज के बाद होते हैं, जैसे कि यूट्रस, ब्रेस्ट, कोलन, एंडोमेट्रियम, इसोफेगस, किडनी, लिवर, पैंक्रियास और ओवरीज को प्रभावित करने वाले कैंसर. हालांकि लोग अक्सर ज्यादा वजन को मुख्य रूप से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी से जोड़ते हैं, लेकिन इसके कैंसर पैदा करने वाले असर भी बहुत ज्यादा हैं और इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.
मोटापा कैंसर का कारण कैसे बनता है
जयपुर के CK बिरला हॉस्पिटल्स में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी और रेडियो सर्जरी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. रुचिर भंडारी का कहना है कि मोटापा सिर्फ शरीर में ज्यादा फैट जमा होना नहीं है, बल्कि यह एक मुश्किल और गंभीर पुरानी हेल्थ कंडीशन है जो हार्मोनल, जेनेटिक और मेटाबोलिक डिसऑर्डर से जुड़ी है. इससे कैंसर भी होता है. मतलब, मोटापा एक ऐसी कंडिशन है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ती है और पुरानी सूजन की स्थिति को बढ़ावा देती है. हार्मोनल इम्बैलेंस के अलावा, यह इंसुलिन और इंसुलिन-लाइक ग्रोथ फैक्टर (IGF-1) के लेवल को बढ़ाता है और इम्यून फंक्शन को बदल देता है. ये सेलुलर-लेवल के बदलाव सेल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं, अनकंट्रोल्ड सेल ग्रोथ को बढ़ावा दे सकते हैं, और बाद में जिंदगी में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं.
लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव जरूरी
उनका कहना हा कि अच्छी खबर यह है कि हेल्दी वजन बनाए रखने से मोटापे से होने वाले कैंसर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है. क्रैश डाइट का सहारा लेने के बजाय, सही तरीका लाइफस्टाइल में बदलाव लाना और धीरे-धीरे वजन कम करना है. कैंसर से बचने के लिए, हेल्दी डाइट (जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन हो) को रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, पूरी नींद और स्मोकिंग और ज्यादा शराब पीने से बचना जरूरी है. थोड़ा-बहुत, लगातार वजन कम होने से भी मेटाबोलिक हेल्थ पर अच्छा असर पड़ सकता है; पुरानी सूजन को कम करके, ये सभी चीजे मिलकर कैंसर का खतरा कम करने में मदद करती हैं.
डॉ. रुचिर भंडारी ने यह भी कहा कि इस बात की कोई पक्की गारंटी नहीं है कि वजन कम करने से कैंसर नहीं होगा, क्योंकि उम्र, फैमिली हिस्ट्री, एनवायरनमेंटल एक्सपोजर और यहां तक कि जेनेटिक्स जैसे फैक्टर आपके रिस्क पर काफी असर डालते हैं. हालांकि, हेल्दी बॉडी वेट बनाए रखना एक मुख्य रिस्क फैक्टर है . (दूसरों के साथ) जिसे आप हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज से एक्टिवली बदल सकते हैं. कैंसर से बचाव एक ही स्टेप से नहीं होता, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों को लगातार अपनाने से होता है. इस तरह, लोग कैंसर का रिस्क कम करके और अपनी ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाकर, दोनों तरह से फायदा उठा सकते हैं.
ज्यादा वजन से 13 तरह के कैंसर का खतरा
जयपुर के नारायणा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. प्रशांत कुंभज के अनुसार, जब हेल्दी वजन बनाए रखने की बात होती है, तो आमतौर पर बातचीत टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव पर केंद्रित होती है. हालांकि, एक और महत्वपूर्ण फायदा है जिस पर शायद ही कभी चर्चा होती है. बढ़ते क्लिनिकल सबूतों के अनुसार, हेल्दी बॉडी वेट बनाए रखना लंबे समय तक कैंसर से बचाव के लिए हमारे सबसे अच्छे हथियारों में से एक है.
शरीर का ज्यादा वजन और मोटापा सीधे तौर पर कम से कम 13 तरह के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं. मेडिकल रिसर्च और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, शरीर में अधिक फैट जमा होने से पुरानी सूजन होती है, इंसुलिन लेवल बिगड़ता है, और हार्मोनल असंतुलन होता है, ये सभी कैंसर सेल्स को बढ़ने में मदद करते हैं.
शरीर के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा फैट निष्क्रिय नहीं होता, यह एक एक्टिव एंडोक्राइन ग्लैंड की तरह काम करता है, जो लगातार सूजन वाले साइटोकिन्स, ज़्यादा एस्ट्रोजन और इंसुलिन को ब्लडस्ट्रीम में छोड़ता रहता है. पुरानी सूजन और हार्मोनल असंतुलन की यह लगातार स्थिति म्यूटेटेड सेल्स को समय के साथ बढ़ने और फैलने का मौका देती है.
रिस्क को काफी कम किया जा सकता है
अच्छी खबर यह है कि वजन कम करके इस रिस्क को काफी कम किया जा सकता है. स्टडीज से पता चलता है कि प्लान करके और धीरे-धीरे वजन कम करने से, भले ही यह शरीर के वजन का सिर्फ 5 फीसदी से 10 फीसदी ही क्यों न हो, इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है, पुरानी सूजन कम हो सकती है, और हार्मोन लेवल नॉर्मल हो सकते हैं.
अपना वजन मैनेज करना सिर्फ अच्छा दिखने या डायबिटीज को कंट्रोल करने के बारे में नहीं है. आपकी डाइट, लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिविटी, ये सभी आपके शरीर के माइक्रो-एनवायरनमेंट को सेलुलर लेवल पर बदलते हैं. यह कैंसर से आपकी भविष्य की हेल्थ को बचाने के लिए एक मजबूत, रोजाना का इन्वेस्टमेंट है.

