धमतरी:- कुछ कर गुजरने की चाह अगर दिल में हो तो इंसान को मौकों की नहीं, दिल में लगन और जुनून की जरूरत होती है. ऐसे ही एक हुनरमंद और जुनूनी इंसान की कहानी से आज हम आपको रुबरू करा रहे हैं, जिनका नाम लीलाराम साहू है. इनकी उम्र 42 साल है. पेशे से शिक्षक लीलाराम साहू को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जा रहा है. लीलाराम साहू को राज्यपाल रमेन डेका प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे.
सरकारी स्कूल को बनाया प्राइवेट से बेहतर
“मेरा स्कूल ही मेरी पहचान है”, इस विचार को नई पहचान दिलाने वाले लीलाराम साहू सरल भाषा में बच्चों को खेल-खेल में वो सबकुछ सिखा रहे हैं, जिसे कभी बच्चे बोझिल यानी भारी समझा करते थे. लालीराम साहू के नवाचार की इस तकनीक से स्कूल का हर बच्चा पढ़ाई में होनहार होता जा रहा है. बच्चों की पढ़ाई का जहां स्तर सुधर रहा है, वहीं स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अब स्कूल जाने के लिए लालायित रहते हैं.
एक शिक्षक ने स्कूल को बनाया विद्या का मंदिर
लीलाराम साहू, धमतरी जिले के शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के प्रधानपाठक हैं. उन्होंने 16 जून 2005 को शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू की. पहले प्राथमिक शाला मुड़पार, फिर प्राथमिक शाला तरसीवां और अब धौराभाठा में पदस्थ हैं. उनके प्रयासों से स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना की गई. लीलाराम साहू के प्रयासों का सबसे बड़ा उदाहरण स्कूल की दर्ज संख्या में हुई वृद्धि है. जिस शाला में कभी महज 28 विद्यार्थी थे, वहां विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 125 तक पहुंच गई.
बच्चों और ग्रामीणों ने कहा, ‘ऐसे शिक्षक गांव की पहचान’
लीलाराम साहू को राज्यपाल पुरस्कार मिलने की खबर से धौराभाठा गांव में खुशी का माहौल है. स्कूल के बच्चों का कहना है कि लीलाराम साहू उन्हें सिर्फ पढ़ाते ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित भी करते हैं. कई बच्चों ने उनके जैसा शिक्षक बनने की इच्छा जताई है.
ग्रामीणों का कहना है कि लीलाराम साहू जैसे समर्पित शिक्षकों की वजह से बच्चों में पढ़ाई के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास की भावना पैदा होती है. उनके प्रयासों से स्कूल की पहचान बनी है और गांव का नाम भी रोशन हुआ है. राज्यपाल पुरस्कार के लिए उनका चयन पूरे धौराभाठा के लिए गौरव की बात है.
23 बच्चों का चयन नवोदय, एकलव्य, जवाहर उत्कर्ष विद्यालय में हुआ
ग्रामीणों ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक शिक्षा से प्रभावित होकर निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले कई बच्चों ने भी सरकारी स्कूल में प्रवेश लिया. अब तक 23 विद्यार्थियों का चयन नवोदय, एकलव्य और जवाहर उत्कर्ष विद्यालयों में हो चुका है.

