भारतीय संस्कृति में दूध और दुग्ध उत्पादों को जीवन के पंचामृत में स्थान दिया गया है। इनमें भी घी को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है। आज कुछ लोग दूध और घी को दोषी ठहराने लगे हैं, जैसे कभी समस्त समस्याओं का कारण वसा को बताया गया, तो कभी ग्लूटेन को, लेकिन सत्य इससे कहीं अधिक गहन और वैज्ञानिक है।
भोजन में उचित मात्रा में घी मिलाने से भोजन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो सकता है। इससे रक्त में ग्लूकोज़ का उतार-चढ़ाव नियंत्रित रहता है और मेटाबालिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का जोखिम घट सकता है।’ यह बातें शिक्षाविद, लेखक, विचारक और विज्ञानी डॉ. तेजप्रकाश व्यास ने तवलीन फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम सोल स्पेस मीट में कही।

