उत्तराखंड:- हरिद्वार में डबल मर्डर मामले में पुलिस ने 3 साधुओं को गिरफ्तार करके इसके पीछे चौंकाने वाला खुलासा किया है.अवैध संबंध का खुलासा होने और गद्दी पाने के लिए हरिद्वार जिले के पथरी क्षेत्र में आरोपियों ने 2 साधुओं की पहले तो हत्या की और फिर उनका शव गड्ढे में दबा दिया था. दोनों साधुओं को मारने के बाद आरोपियों ने मंदिर के पास ही जंगल में शव दफनाने के लिए गड्ढा खोदा गया था. इसके बाद सबूत छिपाने के लिए हॉल में पड़े खून को साफ कर गद्दे को बाहर जला दिया. इसके बाद भागने की कोशिश की. इस दौरान गड्ढा खोदते हुए साधु उत्तम झा ने उन्हें देख लिया था. उत्तम झा को भी धमकाते हुए अपना फोन व सिम तोड़कर कहीं दूर चले जाने की सलाह दी थी.
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 2 साधुओं अखिल गिरी और उत्तम गिरी के बीच अवैध संबंध थे. एक दिन वह वापस लौटा तो उसने परिसर का एक कमरा बंद पाया. कमरे अमूमन बंद नहीं होते हैं ऐसे में पारस गिरी ने हल्का धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया. सामने बेड पर अखिल गिरी और उत्तम गिरी आपत्तिजनक स्थिति में थे. वहीं, सेवा गिरी और पारस गिरी (जान गंवाने वाले) कुछ दिनों से ही मंदिर में ही रह रहे थे. आरोप है कि पारस गिरी और सेवा गिरी ने मुख्य पुजारी अखिल गिरी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. सेवा गिरी और पारस गिरी दोनों ही चाहते थे कि मंदिर की गद्दी उन्हें मिल जाए.
पारस गिरी और सेवा गिरी की ज्यादतियां बढ़ने लगीं तो अखिल गिरी और उत्तम गिरी तनाव में आ गए. एक साजिश के तहत ही 18 जुलाई, 2026 की रात को अखिल गिरी ने सेवा गिरी को पगड़ी पहनाकर मंदिर की गद्दी सौंप दी. इसके बाद अखिल गिरी और अन्य तीनों साधुओं ने हत्या की साजिश रच डाली. साजिश के तहत ही अखिल गिरी ने तीन अन्य साथियों आशु, राममिलन, उत्तम गिरी को साथ लिया.अगली कड़ी में तोनों मोटरसाइकिल से सुल्तानपुर पंचेश्वर मंदिर गए और कुछ देर बाद वापस आ गए. हत्या की मंदिर परिसर में कुल 7 लोग थे. हत्या की प्लानिंग में सेवादार उत्तम झा शामिल नहीं थी, इसलिए वह बगल में ही बने शिव मंदिर में गद्दा लेकर सो गया. इसके बाद चारों आरोपियों (आशु, राममिलन, उत्तम गिरी और अखिल गिरी उर्फ अंकुर) ने सबसे पहले सीसीटीवी बंद कर लिए. अगले चरण में अंदर घुसे और पाठल से गला रेतकर सेवा गिरी की हत्या की. उसके बाद बाथरूम के फर्श पर पारस गिरी को भी मार डाला.

