मानसून के आने से चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलती है, आस-पास का नजारा बदल जाता है और हवा ठंडी हो जाती है. हालांकि, इस मौसमी बदलाव के साथ कुछ हेल्थ प्रॉब्लम भी होती हैं. हर साल, जैसे ही बारिश शुरू होती है, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTIs) के मामलों में ते़जी से बढ़ोतरी होती है. UTI तब होता है जब बैक्टीरिया यूरिनरी सिस्टम में घुसकर कई गुना बढ़ जाते हैं, जिससे सूजन, जलन और तुरंत या बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होती है. हालांकि ये इन्फेक्शन साल के किसी भी समय हो सकते हैं, लेकिन मानसून का मौसम उनके पनपने के लिए सबसे अच्छे हालात बनाता है. सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन की एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दिव्या गोपाल से जानिए इसके बढ़ने के कारण और बचाव के उपाय…
मानसून के दौरान UTI की समस्या क्यों बढ़ जाती है
डॉ. दिव्या गोपाल का कहना है कि मानसून के दौरान UTI के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण हवा में ज्यादा नमी और तापमान में गिरावट के कारण पानी का कम सेवन है. बारिश के सुहावने मौसम में, लोगों को अक्सर कम प्यास लगती है और इसलिए वे कम पानी पीते हैं. पानी की कमी से पेशाब गाढ़ा हो जाता है, यह ब्लैडर में मौजूद बैक्टीरिया को बाहर निकलने से रोकता है, जिससे वे तेजी से बढ़ते हैं.
ह्यूमिडिटी फैक्टर- मानसून के दौरान नमी का लेवल बहुत अधिक होता है. इस मौसम में, पसीना स्किन से आसानी से नहीं निकलता है. इसके अलावा, अचानक बारिश में भीगने या पानी भरी सड़कों से गुजरने का मतलब अक्सर लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना होता है. यह लगातार नमी (खासकर पेल्विक एरिया में) बैक्टीरिया के पनपने के लिए एक अच्छी जगह बन जाती है.
बारिश के मौसम में जरुर करें ये काम
डॉ. दिव्या गोपाल का कहना है कि मानसून के दौरान UTI से बचने के लिए, आपको अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव करने होंगे, जैसे कि…
हाइड्रेटेड रहें: प्यास लगने का इंतजार न करें। कोशिश करें कि पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहें. शरीर में पानी की सही मात्रा होने पर पेशाब हल्का पीला और साफ होता है और यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) नियमित रूप से साफ होता रहता है.
हवादार कपड़े पहनें: सिंथेटिक और टाइट कपड़ों की जगह ढीले और हवादार सूती (कॉटन) कपड़े पहनें. सूती कपड़े हवा को आने-जाने देते हैं और नमी सोखते हैं, जिससे प्राइवेट एरिया सूखा रहता है और बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो जाता है.
गीले कपड़े तुरंत बदलें: अगर बारिश या पसीने से आपके कपड़े गीले हो जाएं, तो उन्हें जल्द से जल्द बदलकर सूखे कपड़े पहन लें. गीले एक्टिववियर या नमी वाले अंडरगारमेंट्स पहनकर ज्यादा देर तक न बैठें.
साफ-सफाई का ध्यान रखें: टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की तरफ पोंछें ताकि बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट में न जा सकें. उस हिस्से को सादे पानी से धीरे-धीरे धोएं और अच्छी तरह सुखा लें
ध्यान देने वाली जरूरी बातें
डॉ. दिव्या गोपाल का कहना है कि अपने यूरिनरी सिस्टम (मूत्र प्रणाली) को स्वस्थ रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि किन आदतों से बचना चाहिए, जैसे कि…
पेशाब को रोककर न रखें: पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करने में हिचकिचाहट होना आम बात है, खासकर मॉनसून के मौसम में. लेकिन, ज्यादा देर तक पेशाब रोकने से ब्लैडर फैल जाता है और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. जब पेशाब करने की इच्छा हो, तो अपने शरीर की बात सुनें.
ज्यादा तेज असर वाले इंटिमेट प्रोडक्ट्स से बचें: प्राइवेट पार्ट्स के लिए खुशबूदार साबुन, डिओडोरेंट स्प्रे या तेज असर वाले वॉश का इस्तेमाल न करें. ये प्रोडक्ट्स उन प्राकृतिक और अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं जो इन्फेक्शन से बचाते हैं, जिससे आप ज्यादा आसानी से बीमार पड़ सकते हैं.
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें: UTI शायद ही कभी अपने आप ठीक होता है. अगर आपको लगातार जलन महसूस हो, अचानक और तुरंत पेशाब करने की जरूरत महसूस हो, या पेशाब धुंधला दिखे, तो इसके ठीक होने का इंतजार न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. UTI सिर्फ एक छोटी-मोटी परेशानी नहीं है, अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इन्फेक्शन किडनी तक फैल सकता है, जिससे सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

