हिंदू धर्म में संस्कारों और परंपराओं के पीछे गहरे आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर अवसर के लिए विशिष्ट रंगों का चयन किया गया है। जहां विवाह और उत्सवों में लाल और पीले जैसे चटख रंगों का बोलबाला होता है, वहीं अंतिम संस्कार के समय सफेद रंग एक अनिवार्य परंपरा बन गया है। आइए जानते हैं इस सादगी भरे रंग के पीछे छिपे गूढ़ रहस्यों को।
अंतिम विदाई में सफेद रंग ही क्यों
मृत्यु जीवन का वह सत्य है जिसे स्वीकार करना कठिन होता है। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के दौरान सफेद वस्त्र पहनना केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश है।
सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक
सफेद रंग को ‘सत्व गुण’ का प्रतीक माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा अपने नश्वर शरीर को त्यागकर मोक्ष की यात्रा पर निकलती है। सफेद वस्त्र धारण करना आत्मा की शुद्धता और उसकी शांति के लिए की जाने वाली सामूहिक प्रार्थना का हिस्सा है। यह रंग मन को एकाग्र करने और नकारात्मकता को दूर रखने में मदद करता है।

