एक आम समस्या है धूप के प्रति सेंसिटिविटी के कारण स्किन का तेजी से जलना, जिसे ‘सनबर्न’ कहते हैं. यह अक्सर ‘फोटोडर्मेटोसिस’ (सूरज से होने वाली एलर्जी) या ‘ल्यूपस’ जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण होता है, इससे प्रभावित लोगों को तेज गर्मी के संपर्क में आने पर त्वचा में लालिमा, सूजन, खुजली और फफोले पड़ने जैसी समस्याओं का अनुभव हो सकता है. आमतौर पर, शरीर इस स्थिति को अपने आप ठीक कर लेता है. हालांकि, यदि शरीर इस समस्या को स्वाभाविक रूप से ठीक करने में असमर्थ रहता है, तो यह ‘जेरोडर्मा पिगमेंटोसम’ (XP) का एक गंभीर संकेत हो सकता है.
क्या है जीरोडर्मा पिगमेंटोसम
जेरोडर्मा पिगमेंटोसम (XP) एक बहुत ही दुर्लभ और गंभीर जेनेटिक बीमारी है जिसमें त्वचा और आंखें सूरज की रोशनी में मौजूद अल्ट्रावॉयलेट किरणों के प्रति हाइपरसेंसिटिव हो जाती हैं. इस कंडीशन में, शरीर UV किरणों से होने वाले DNA डैमेज को रिपेयर नहीं कर पाता, जिससे स्किन कैंसर और समय से पहले बुढ़ापा जैसी गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है. इस कंडीशन से परेशान कुछ लोगों को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम भी हो सकती हैं. बता दें, यह अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन सूरज की रोशनी के साथ-साथ कुछ तरह की आर्टिफिशियल लाइट में भी पाया जा सकता है.
जेरोडर्मा पिगमेंटोसम कैसे होती है
जेरोडर्मा पिगमेंटोसम (XP) एक दुर्लभ, जेनेटिक कंडिशन है जो आपको अपने माता-पिता से विरासत में मिलती है. XP से पीड़ित व्यक्ति, अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन (UVR) के कारण शरीर को होने वाले नुकसान की प्रभावी ढंग से मरम्मत नहीं कर पाता है, यह रेडिएशन दिन की रोशनी में हर समय मौजूद रहता है. XP एक जीवन भर रहने वाली स्थिति है. वर्तमान में इसका कोई ज्ञात इलाज नहीं है, लेकिन XP को कंट्रोल करने के तरीके मौजूद हैं.
जेरोडर्मा पिगमेंटोसम (XP) एक गंभीर जेनेटिक बीमारी है जो जन्म से होती है, लेकिन इसके लक्षण आमतौर पर बचपन में धूप में रहने के बाद धीरे-धीरे दिखने लगते हैं. यह एक ऑटोसोमल रिसेसिव कंडीशन है, जिसका अर्थ है कि बच्चे को रोग होने के लिए माता और पिता दोनों से दोषपूर्ण जीन विरासत में मिलना आवश्यक है. अगर माता-पिता दोनों कैरियर हैं, तो हर बच्चे में XP होने का 25 फीसदी चांस होता है.
जेरोडर्मा पिगमेंटोसम के लक्षण और संकेत
XP से पीड़ित लोगों में इनमें से कुछ या सभी लक्षण और संकेत हो सकते हैं, जैसे कि…
आसानी से धूप में सनबर्न हो जाना, चाहे आपकी त्वचा का रंग कोई भी हो.
कम उम्र (2 साल से कम) से ही, दिन की रोशनी के संपर्क में आने वाले हिस्सों पर झाइयां पड़ना.
तेज रोशनी के प्रति आंखों की संवेदनशीलता (फोटोफोबिया) होना.
आंखों की सतह का कैंसर.
त्वचा का कैंसर.
त्वचा का समय से पहले बूढ़ा होना.
नस या दिमाग (न्यूरोलॉजिकल) से जुड़ी समस्याएं, जैसे सुनने की क्षमता में कमी, शरीर का संतुलन बिगड़ना, याददाश्त कमजोर होना या सीखने में कठिनाई होना शामिल है
अगर आपको अपनी स्किन को लेकर कोई चिंता है, तो उसके बारे में तुरंत बात करना जरूरी है. आप अपने लोकल डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकते हैं. अगर आपको अपनी आंखों के बारे में कोई चिंता है, तो आप अपने लोकल आई स्पेशलिस्ट (ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट) से संपर्क कर सकते हैं.
XP का पता ऐसे लगाएं
बायोप्सी –
XP का पता लगाने के लिए आपको टेस्ट करवाने होंगे. आपकी स्किन बायोप्सी और जेनेटिक ब्लड टेस्ट हो सकता है. स्किन बायोप्सी के दौरान, स्किन का एक छोटा टुकड़ा (एक सैंपल) डॉक्टरों के द्वारा निकाला जाता हैं और उसे टेस्टिंग के लिए लैब में भेजा जाता हैं. जहा से बायोप्सी ली जाती है, वहां स्किन के उस हिस्से को सुन्न करने के लिए आपको एक इंजेक्शन (एक लोकल एनेस्थेटिक) दिया जाता है.
जेनेटिक ब्लड टेस्ट-
जेनेटिक ब्लड टेस्ट के दौरान, खून का एक छोटा सैंपल लिया जाता है. फिर इसे जेनेटिक्स लैब में भेजा जाता है. इसमें उन जीन्स का टेस्ट करते हैं जो XP की वजह माने जाते हैं.
XP को मैनेज करना
XP जिंदगी भर रहने वाली बीमारी है, लेकिन इसे इस कई तरह से मैनेज किया जा सकता है…
अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन से बचाव- सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा और आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक होती हैं. इसलिए, अगर आपको XP है, तो अपनी त्वचा और आंखों को होने वाले नुकसान को कम करना बहुत जरूरी है. अगर आप खुद को UVR से नहीं बचाते हैं, तो त्वचा पर पड़ने वाले धब्बे और भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. साथ ही, त्वचा के कैंसर होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है.
रेगुलर स्किन चेकअप- रेगुलर स्किन चेकअप (आमतौर पर हर 3 से 6 महीने में) से त्वचा के कैंसर के किसी भी लक्षण का जल्दी पता लगाया जा सकता है, ताकि उनका इलाज और भी तेजी से किया जा सके. यदि पीड़ित इन कैंसर का जल्दी पता नहीं लगाते हैं, तो वे आकार में बड़े हो सकते हैं, और जब सर्जरी के माध्यम से बड़े कैंसर को निकालते हैं, तो उससे त्वचा पर अधिक निशान पड़ते हैं. इसके साथ ही अगर कैंसर का जल्दी पता नहीं चलता, तो यह जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह दूसरे अंगों में फैल सकता है.
रेगुलर टेस्ट जरूरी- अगर आप हर साल कम से कम एक बार आंखों की जांच करवाते हैं, तो इससे आंखों की रोशनी से जुड़ी किसी भी समस्या का पता चल सकता है. इसके बाद आप उचित इलाज करवा सकते हैं, जैसे कि आई ड्रॉप, चश्मा, या आंख के किसी भी संदिग्ध हिस्से की बायोप्सी. इसके साथ ही, न्यूरोलॉजिकल जांच से दिमाग या नसों से जुड़ी किसी भी समस्या का पता लगाया जा सकता है.
विटामिन D का लेवल चेक करना भी जरूरी है- XP वाले ज्यादातर लोगों में विटामिन D का लेवल कम होता है क्योंकि उन्हें अपनी स्किन को धूप से बचाना होता है. खून की जांच से आपके विटामिन D लेवल का पता लगाया जा सकता है. अगर आपका लेवल कम है, तो हम आपको विटामिन D सप्लीमेंट लेनी पड़ सकती है. नहीं तो, आपकी हड्डियां कमजोर होने का ज्यादा चांस होता है.

