रायपुर:- राज्य में बिजली के उपयोग और बिल भुगतान की व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने बिजली कंपनी के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें बिजली बिल का अग्रिम भुगतान करने पर बल्ब जलेगी। अब उपभोक्ताओं को बिजली का उपयोग करने से पहले मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना होगा।
योजना के पहले चरण में सरकारी विभागों को लिया गया है, जहां करोड़ों का बकाया कंपनी के लिए सिरदर्द बना है। बिजली वितरण कंपनी के अनुसार, योजना के प्रथम चरण में ब्लाक स्तर के सभी सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड मोड पर डाला जा रहा है।
एक अप्रैल से प्रीपेड व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी
इसके लिए 1.72 लाख सरकारी कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें से करीब 1.5 लाख मीटर इंस्टाल किए जा चुके हैं। शेष 22 हजार मीटर लगाने के लिए पंचायत और आंगनबाड़ी केंद्रों में युद्ध स्तर पर काम जारी है। एक अप्रैल से इन सभी कनेक्शनों पर प्रीपेड व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।
3,500 करोड़ का बकाया बना कारण
प्रीपेड सिस्टम लागू करने के पीछे सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बढ़ता बकाया सबसे बड़ी वजह है। कंपनी के अनुसार, अगस्त 2024 में बकाया 1,988 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक यह बढ़कर 2,444.91 करोड़ रुपये हो गया।
वर्तमान में यह 3,000 करोड़ के पार जा चुका है और मार्च के अंत तक इसके 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसमें सर्वाधिक बकाया नगरीय निकायों पर करीब 2,000 करोड़ और विकास विभाग 600 करोड़ रुपये है।
तीन महीने का एडवांस रिचार्ज करना अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत विभागों को अब अपने औसत मासिक बिल के आधार पर तीन महीने की राशि अग्रिम जमा करनी होगी। रिचार्ज खत्म होने से पहले अगले तीन महीनों का भुगतान करना अनिवार्य होगा, अन्यथा बिजली स्वतः गुल हो जाएगी।पुराने बकाये को निपटाने के लिए सरकार ने विभागों के बजट से किस्तों में भुगतान की व्यवस्था की है, जिसके तहत पावर कंपनी को 600 करोड़ रुपये की पहली किस्त प्राप्त हो चुकी है।

