बलौदाबाजार:- जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर के बाद आखिरकार कार्रवाई शुरू हो गई है.पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम छेरकाडीह जारा में संचालित कथित झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक में गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत का मामला प्रमुखता से उठाया. जिसके बाद पुलिस ने क्लिनिक पर दबिश दी. रेड के दौरान क्लिनिक से 10.08 ग्राम गांजा बरामद किया गया और संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया.
क्लिनिक सील करने पहुंची टीम, घेराबंदी कर की गई कार्रवाई
पुलिस थाना पलारी की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम छेरकाडीह जारा में अवैध रूप से संचालित एक क्लिनिक में मादक पदार्थ रखा गया हैय बताया जाता है कि इसी क्लिनिक में कुछ दिन पहले एक 25 वर्षीय गर्भवती नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, जिसके बाद मामला चर्चा में आया. सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची. क्लिनिक को सील करने की प्रक्रिया के दौरान घेराबंदी की गई और संचालक की मौजूदगी में तलाशी ली गई. तलाशी के दौरान एक पुड़िया में पैक किया गया अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ.
10.08 ग्राम गांजा जब्त, NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज
बरामद गांजा का मौके पर विधिवत तौल कराया गया. तौल में कुल 10.08 ग्राम अवैध मादक पदार्थ पाया गया.पुलिस ने गांजा जब्त कर आरोपी के खिलाफ थाना पलारी में अपराध क्रमांक 93/2026 दर्ज किया है. मामले में धारा 27 ख तथा 20(बी)(1) NDPS एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पुलिस के अनुसार प्रकरण की विवेचना जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि क्लिनिक में और क्या-क्या अनियमितताएं थीं.
मौत से उठे सवाल, अब जांच के घेरे में पूरा मामला
गौरतलब है कि ग्राम छेरकाडीह जारा में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था. महिला सर्दी-खांसी की शिकायत लेकर क्लिनिक पहुंची थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई.अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी. सबसे गंभीर बात यह रही कि शव का पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया गया.पुलिस में भी तत्काल कोई औपचारिक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अवैध क्लिनिकों और बिना डिग्री इलाज करने वाले लोगों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
बिना डिग्री इलाज, अब मादक पदार्थ बरामद
स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई थी कि क्लिनिक संचालक के पास वैध मेडिकल डिग्री नहीं थी, इसके बावजूद वह गांव में इलाज कर रहा था. अब उसी क्लिनिक से गांजा बरामद होना मामले को और गंभीर बना देता है.सवाल यह है कि एक अवैध रूप से संचालित क्लिनिक में मादक पदार्थ कैसे पहुंचा? क्या यह केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए था या किसी और उद्देश्य से रखा गया था? क्या क्लिनिक के नाम पर और भी अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं? इन सभी पहलुओं की जांच अब पुलिस और संबंधित विभागों के लिए चुनौती है.
