रायपुर :- लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। संचालनालय द्वारा सभी संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा संभाग तथा समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए और उन्हें उनकी मूल पदस्थापना शाला में वापस भेजा जाए।
जारी पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विभाग में कार्यरत कई शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी मूल सेवाओं को छोड़कर विभिन्न कार्यालयों एवं संस्थाओं में गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं। DPI ने इसे गंभीर प्रशासनिक और शैक्षणिक चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि ऐसे संलग्नीकरण से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। आदेश के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करते हुए शिक्षकों को मूल शालाओं में उपस्थिति सुनिश्चित करानी होगी तथा की गई कार्रवाई से संचालनालय को अवगत कराना होगा।
यह आदेश स्कूल शिक्षा विभाग के 28 फरवरी 2024 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए जारी किया गया है। उस समय राज्य शासन द्वारा DPI, कमिश्नर, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना हेतु कार्यमुक्त किया जाए। शासन के अनुसार, राज्य स्तर पर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि बड़ी संख्या में शिक्षक विभिन्न कार्यालयों में गैर शिक्षकीय कार्य कर रहे हैं, जिससे विद्यालयों में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है।
नवीनतम आदेश में यह भी कहा गया है कि संलग्नीकरण समाप्त किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र सात दिवस के भीतर संचालक, लोक शिक्षण को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाए। इससे यह संकेत मिलता है कि इस बार अनुपालन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी भी बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है जब इस प्रकार के निर्देश जारी किए गए हों। पूर्व में भी कई बार ऐसे आदेश जारी हुए हैं, जिनमें गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को मूल शालाओं में वापस भेजने की बात कही गई थी। लेकिन व्यवहारिक स्तर पर अक्सर यह देखा गया है कि कुछ समय के लिए संलग्नीकरण समाप्त किया जाता है और बाद में पुनः प्रतिनियुक्ति या डिप्टेशन दे दिया जाता है।

