पूरे देश के अलग-अलग हिस्से में इस समय होली की धूम मची है. होली हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो खुशियों, रंगों और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. इस दिन का इंतजार सभी को बेसब्री से रहता है. इस दिन लोग एक-दूसरे के चेहरे पर रंग लगाकर प्यार और स्नेह के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है.
होली में कई मान्यताएं: होली का पर्व हर साल फाल्गुन पूर्णिमा पर मनाया जाता है. चूंकि इस वर्ष चंद्र ग्रहण लगने के कारण सोमवार को ही देश के कई हिस्से में होलिका दहन का कार्यक्रम हो गया, जिस कारण होली पर्व बुधवार को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में सभी त्योहारों से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं और परंपराएं होती हैं.
दुल्हन को ससुराल में नहीं मनानी चाहिए होली: इसी तरह होली की एक मान्यता नई-नवेली दुल्हन से भी जुड़ी हुई है. मान्यता के अनुसार, शादी के बाद नई दुल्हन की अपनी पहली होली अपने ससुराल में नहीं माननी चाहिए, बल्कि शादी के बाद नई दुल्हन को पहली होली हमेशा अपने मायके में ही मनानी चाहिए.
क्या है पौराणिक मान्यता: गांव के बुजुर्ग के अनुसार, होलिका के आग में बैठने के अगले दिन उसका विवाह होना था. जब होलिका की होने वाली सास बारात लेकर पहुंची, तो उसने होलिका की चिता को जलते हुए देखा. इसके बाद से हिंदुओं में होली पर नई बहू के मायके जाने की परंपरा शुरू हो गई और तब से आज भी नई बहू अपने ससुराल में पहली होली नहीं देखती. नई दुल्हन को पहली होली से कुछ दिन पहले उसके मायके भेज दिया जाता है, जिसके बाद वह अपने मायके में होली मनाती है.
वहीं मिथिला में मैथिल ब्राह्मणों में रस्म है कि दामाद की पहली होली ससुराल में मनती है. दामाद के स्वागत में होली के अवसर पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं. पहली होली में दामाद को कई तरह के उपहार भी ससुराल की तरफ से मिलते हैं. इसके पीछे के कारणों के बारे में कहा जाता है कि लड़का अपनी पत्नी के परिवार को ठीक से समझ सके इसलिए यह आवश्यक होता है.

