गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी या गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है और विशेष रूप से महाराष्ट्र में इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. यह त्योहार भगवान गणेश के आगमन का प्रतीक है, जो विघ्नहर्ता, ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत के अग्रदूत माने जाने वाले देवता हैं. इस त्योहार की सबसे खास बात यह है कि लगभग कोई भी व्यक्ति गणेश जी की मूर्ति घर ला सकता है और अंतिम विसर्जन तक उनकी पूजा और प्रसाद चढ़ा सकता है, जो व्यक्ति की क्षमता के अनुसार एक दिन, तीन दिन या दस दिन में भी किया जा सकता है.
इस वर्ष गणेश चतुर्थी बुधवार, 27 अगस्त को मनाई जा रही है. चतुर्थी तिथि 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे शुरू होगी और 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे समाप्त होगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश पूजा के लिए सबसे शुभ समय 27 अगस्त को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे के बीच है. यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और शनिवार, 6 सितंबर, 2025 को गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा.
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन वर्जित क्यों हैं
गणेश चतुर्थी पर मनाई जाने वाली एक प्रमुख सांस्कृतिक परंपरा चंद्रमा के दर्शन (चंद्रमा के दर्शन) से परहेज करना है. यह प्रथा पौराणिक कथाओं में निहित है. एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश का उपहास किया, जिसके कारण उन्हें श्राप मिला कि जो कोई भी गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखेगा, उसे मिथ्या दोष (झूठा आरोप या अपमान) का सामना करना पड़ेगा और उसे कलंकित किया जाएगा.
कब ना देखें चंद्रमा
यह खास तौर से 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे से रात 8:29 बजे तक और 27 अगस्त को सुबह 9:28 बजे से रात 8:57 बजे तक लागू है. इस तिथि और समय के दौरान चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए. लोक कथाओं के अनुसार, यह प्रथा को भगवान कृष्ण से भी जोड़ी है, जिन पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगाया गया था. नारद मुनि ने बताया कि कृष्ण ने अनजाने में गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लिया था. जिसके बाद उन पर यह आरोप लगा. इसलिए झूठे आरोपों से बचने के लिए भक्त इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करते हैं. अगर गलती से चंद्रमा दिख भी जाए, तो पारंपरिक उपाय के तौर पर स्यमंतक मणि की कहानी सुनने या पढ़ने से इस अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है.
क्या है मिथ्या दोष मंत्र
यदि गणेश चतुर्थी पर गलती से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं, तो पारंपरिक उपाय यह है कि इस मंत्र का पाठ किया जाए, जो स्यामंतक मणि की कथा से संबंधित है और माना जाता है कि इससे मिथ्या दोष दूर होता है.
मंत्र इस तरह है…
सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मरोदिस्तव ह्येषा स्यामंतक:

