फरवरी का महीना प्यार और लाल गुलाबों की खुशबू लेकर आता है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि वैलेंटाइन वीक के आसपास ब्रेकअप के मामले अचानक बढ़ जाते हैं। जिस समय को रोमांस का शिखर माना जाता है, वही समय कई रिश्तों के टूटने की वजह भी बन जाता है। इसके पीछे कई गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण छिपे हैं।
उम्मीदों का दबाव और दिखावा
वैलेंटाइन डे को लेकर फिल्मों और विज्ञापनों ने ‘परफेक्ट रोमांस’ की एक ऐसी छवि बना दी है, जिसका बोझ उठाना सबके लिए मुमकिन नहीं होता। जब पार्टनर की उम्मीदें चांद-तारे तोड़ लाने जैसी होती हैं और दूसरा इसे महज एक सामान्य दिन मानता है, तो यह ‘एक्सपेक्टेशन मिसमैच’ बड़े झगड़ों को जन्म देता है।
रिश्ते का लिटमस टेस्ट
यह हफ्ता अक्सर रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर साबित होता है। लोग खुद से सवाल करते हैं- “क्या मैं इस व्यक्ति के साथ भविष्य देखता हूं?” यदि मन में जरा सा भी संदेह हो, तो 14 फरवरी से पहले रिश्ता खत्म करना बेहतर समझा जाता है ताकि झूठे वादे और दिखावे के जश्न से बचा जा सके।
सोशल मीडिया और तुलना का जहर
आजकल प्यार निजी से ज्यादा सार्वजनिक हो गया है। दूसरों के महंगे तोहफों और हॉलिडे पोस्ट से अपने रिश्ते की तुलना करना हीन भावना पैदा करता है। यह तुलना पार्टनर की खूबियों के बजाय उसकी कमियां दिखाने लगती है, जो रिश्तों में दरार का बड़ा कारण है।
आर्थिक और व्यवहारिक तनाव
गिफ्ट्स, डिनर और सेलिब्रेशन का बढ़ता खर्च कई बार आर्थिक तनाव पैदा करता है। इसके अलावा, इस दौरान लोग अपने पार्टनर के व्यवहार को बारीकी से नोटिस करते हैं। यदि पार्टनर खास दिन के लिए कोशिश नहीं करता, तो इसे ‘इमोशनल डिस्कनेक्ट’ मान लिया जाता है।

