रायपुर : छत्तीसगढ़ में यूँ तो कई प्रतियोगी परीक्षाएं होती है लेकिन PSC (लोक सेवा आयोग) की परीक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा है इसके लिए विद्यार्थी सालों साल मेहनत करते हैं इसी कड़ी में आज हम आपको हम एक ऐसे राज्य प्रशासनिक अधिकारी के बारे में बताने वाले हैं जिसके बारे में जानकर आप भी पढाई करने बैठ जाएंगे।
साल 2017 में CG PSC ने परीक्षा का परिणाम जारी किया, इसमें कई टॉपर और रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों का नाम आया लेकिन एक नाम ऐसा जिसकी कहानी वाकई में दिलचस्प है और वह नाम हैं गौतम चंद पाटिल (deputy collector gautam chand patil ) है। डिप्टी कलेक्टर गौतम चंद पाटिल कवर्धा कबीरधाम ) जिले के बोड़ला ब्लॉक के छोटे से गाँव मोतिनपुर के रहने वाले है।

इनके पिता शिक्षा विभाग में मास्टर के पद पर हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गौतम चंद पाटिल डिप्टी कलेक्टर बनने से पहले वन विभाग में वन रक्षक (FOREST GAURD ) की नौकरी करते थे। वन रक्षक की नौकरी के साथ -साथ गौतम पाटिल ने राज्य की सबसे कठिन परीक्षा कही जाने वाली प्रतियोगी परीक्षा पीएससी की तैयारी में जुटे रहे। दो बार गौतम को इस परीक्षा में सफलता हांसिल नहीं हुई लेकिन गौतम हार नहीं माने और प्रयास करते रहे।
गौतम पाटिल तीसरी बार फिर से 2017 की परीक्षा में शामिल हुए और 2017 के लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उन्हें ग़दर मचा देने वाला रैंक मिला। जी हाँ गौतम पाटिल ने पुरे छत्तीसगढ़ में 2nd rank हासिल किया। प्रदेश में में दूसरा स्थान मिलने के बाद गौतम के परिवार वाले तो खुश थे ही लेकिन उनके दोस्तों में उनसे कहीं ज्यादा खुशी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि जब गौतम फारेस्ट गॉर्ड की नौकरी करते हुए पढाई करते थे तब उनके दोस्तों ने उनकी मेहनत को काफी करीब से देखा था।

लाखों अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद की किरण
निश्चित तौर पर गौतम की इस सफलता ने लाखो युवाओं के अंदर उम्मीद जगा दी और आज उस जिले में हजारो अभ्यर्थी जो गरीबी और कई समस्याओं से जूझ रहे थे वो भी मेहनत करने लगे। क्योंकि किसी ने ये उम्मीद नहीं किया था कि जंगलों में वादियों के बीच नौकरी करने वाले गौतम कभी डिप्टी कलेक्टर बनकर आएँगे लेकिन गौतम ने सब की जुबां पर मेहनत का ताला मार दिया।
इंटरव्यू में नहीं मिली थी सफलता
एक चर्चा में गौतम ने बताया कि दूसरे अटेम्प में उन्हें इंटरव्यू से ही समझौता करना पड़ा था उन्होंने कहा कि परेशानियां हर किसी को है लेकिन उन परेशानियों के चौखटों को पार कर जो आगे आता है वही इतिहास रचता है। मेरा प्रारम्भ से ही सपना था कि मुझे प्रशासनिक पद पर जाना है और सेवा करना है और आज मेरा यह सपना पूरा हुआ इसके लिए उन तमाम लोगों को मेरे परिजनों को और खास तौर पर उन दोस्तों को जिन्होंने हर राह मेरी मदद की उनका धन्यवाद करता हूँ।

कभी गाँव के खेत की जुताई करते थे गौतम
डिप्टी कलेक्टर गौतम चंद पाटिल ने बताय कि गाँव में खेती किसानी भी करते थे कभी हल चलना तो कभी फसलों की कटाई करना , लेकिन समय निकल कर अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पढाई भी करते थे। जब गांव के लोगों को उनके स्कूल के साथियों को पता चला कि गौतम डिप्टी कलेक्टर बन गया है तब उस समय गाँव में खुसी की बयांर चलने लगी , पूरा गाँव जश्न मनाने लगा।


