बिलासपुर:- बरसात के दिनों में एक बार फिर आवारा कुत्तों के स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पानी गिरने के कारण अधिकांश जगह गीली हो जाती हैं। इससे कुत्तों के लिए बैठने का स्थान कम हो जाते हैं। साथ ही वर्षा में भीगने के कारण कुत्तों को बुखार आने से तापमान बढ़ जाता है और वह तीन-चार दिनों से भूखे रहते हैं। ऐसे में चिड़चिड़ेपन की वजह से कुत्ते राहगीरों पर हमला करने लगते हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो बीते दो दिन शुक्रवार और शनिवार को कुत्ता काटने से संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स में 50 मामले सामने आए। इनमें अकेले 35 लोग बिलासपुर शहर के थे। दो दिन के भीतर सिम्स पहुंचे मरीजों की सिम्स के चिकित्सकों ने काउंसिलिंग की तो यह बात सामने आई कि ये कुत्ते अकेले नहीं, बल्कि झुंड बनाकर हमला कर रहे हैं। यह छोटे बच्चों और बुजर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है।
शहर में घुम रहे 10 हजार से ज्यादा कुत्ते
नगर निगम समय-समय पर कुत्ते भागने का काम करती है, जो कुछ ही दिनों में वापस लौट आते हैं। इसी तरह संख्या नियंत्रण के लिए कुत्तों की नसबंदी भी की जाती है, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से लगातार कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।